लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस के बाद भी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सचिवालय सेवा अफसर की तैनाती में न नियम है न मानक, वहाँ मनमाने तरीके से तैनाती का पूरा एक खेल चल रहा है। उदाहरण के तौर पर नगर विकास, स्वास्थ्य विभाग, पर्यटन विभाग एवं आवास विकास जैसे मालामाल विभागों में तैनाती में पूरा खेल मुख्यमंत्री कार्यालय को ठेंगा दिखाते हुए जारी है। मनमाने ढंग से आवास विभाग से जिस अनुभाग अधिकारी को हटाया गया उसे फिर दोबारा इसी विभाग में मलाईदार पोस्ट पर फिर भेज दिया गया ऐसा ही खेल पर्यटन, स्वास्थ्य एवं नगर विकास जैसे अन्य विभागों में किया गया।
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार एवं सचिवालय प्रशासन की नियमावली कहती है कि सचिवालय प्रशासन में तीन कैटेगरी के अधिकारी होते हैं, ए,बी और बाकी बचे सी श्रेणी के. लाज़मी है जब ग्रुप ए है तो इसमें सारे मालाबार हिल वाले अधिकारियों की ही पूछ और मूँछ होगी। इस श्रेणी ए में प्रमुख विभाग अधिकारी आते हैं, बी श्रेणी में जो हल्के थोड़ा होते हैं वही इस श्रेणी को सुशोभित करता है। शर्त सिर्फ इतनी है उसकी सेवा अवधि 12 साल ही ए में रहा हो। कमाल यहाँ भी है प्रभु श्रीराम राम के राज्य में जल्दी से जल्दी मतलब वायरल बुखार की तरह अपने पुराने विभाग में तुरंत नहीं भेजा जा सकता है। ऐसा सचिवालय प्रशासन के पन्नों में लिखा है।
अब मजेदार तथ्य है कि बी ग्रुप में ए ग्रुप में खेल कहां हुआ…!
दुर्गा पाठक पहले आवास विभाग में थे फिर स्वास्थ्य में गए और फिर आवास में फिर प्राइम पोस्ट पर विराजमान, इतना ही चामत्कारिक मामला नहीं है, और भी होता है। नगर विकास के सी पी सिंह, अखिलेश्वर सिंह जैसे लोग सालों से अपनी अपनी कुर्सियों पर जमे हैं जबकि नियमावली कहती कि एक ही पद पर लंबे समय तक कोई अधिकारी नियुक्ति नहीं रह सकता । इसी तरह अब मोहम्मद वासिफ का तो मामला बेहद गजब का है थे नगर विकास विभाग में से हटाए गए फिर पर्यटन विभाग फिर शासन में सुशोभित उपसचिव की नवीनतम तैनाती की गई।
पुराना बेहद पावरफुल समीक्षा अधिकारी सचिवालय प्रशासन में प्रमुख बन बैठा
सूत्रों की माने तो सचिवालय प्रशासन के गलियारे में बरसातों की पानी की तरह एक ख़बर टपक रही है। आवास विभाग का एक पुराना बेहद पावरफुल समीक्षा अधिकारी सचिवालय प्रशासन में प्रमुख बना बैठा है। खेल तमाशा का सुख लाभ बारिश के मौसम में राम मंदिर चंदा चोरी से होते हुए नारंगी रंग के सरकारी बिल्डिंगों में बैठे आला हाकिम के शतरंज के ऊंट, घोड़े और पैदल पर ही ज्यादा ही बरस रहीं हैं। इस मौसमी बरसात की शारदीय रातें आगामी चुनावों में क्या गुल या योगी सरकार का कहर बरपाती हैं इसे तो मुख्यमंत्री कार्यालय जाने या प्रभु श्रीराम।












