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क्या शराब की कंपनियां आपको बना रही पागल? FSSAI ने जारी कर दिया नोटिस

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) अब एनर्जी ड्रिंक के बाद शराब बनाने वाली कंपनियों पर सख्ती दिखा रहा है। FSSAI ने शराब बनाने वाली कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है और नियमों के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किया है। FSSAI ने कहा है कि कुछ कंपनियां एक्स्ट्रा फ्लेवर का इस्तेमाल कर रही हैं और प्रोडक्ट लेबल पर प्रोडक्ट की उम्र से जुड़े भ्रामक दावे कर रही हैं। FSSAI अब इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

FSSAI के अनुसार, यह नोटिस खाद्य सुरक्षा और मानक (मादक पेय पदार्थ) विनियम, 2018 के तहत निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए FSS एक्ट, 2006 के तहत लाइसेंस प्राप्त कंपनियों फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को जारी किया गया है। इस नोटिस के बाद कंपनियों को निर्धारित समय में जवाब देने के लिए कहा गया है।

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सोशल मीडिया पर दी जानकारी

FSSAI ने इसको लेकर अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया है। FSSAI ने पोस्ट में कहा, ‘FSSAI ने शराब निर्माताओं को फ्लेवर मिलाने और उम्र से संबंधित भ्रामक दावों से संबंधित नियामक प्रावधानों का कथित रूप से पालन न करने के लिए नोटिस जारी किए हैं और यह स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।’

कहां खेल कर रही थी कंपनियां?

FSSAI ने इन कंपनियों के प्रोडक्ट्स की जांच की है। जांच में सामने आया कि कुछ कंपनियों अपने उत्पादों में ऐसे एक्स्ट्रा सिंथेटिक फ्लेवर का इस्तेमाल कर रही हैं, जो व्हिस्की, वाइन और अन्य शराब के प्रोडक्ट्स के नेचुरल स्वाद और खुशबू की नकल करते हैं। FSSAI का कहना है कि इस तरह अनाधिकृत फ्लेवर का उपयोग ना केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता के बारे में गुमराह किया जाता है।

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उम्र को लेकर क्या विवाद?

शराब की बोतल के प्रोडक्ट लेबल पर प्रोडक्ट की एज को लेकर किए जा रहे दावों पर भी FSSAI ने सवाल उठाए हैं। शराब की बोतलों पर 8 से 12 साल पुरानी होने का दावा किया जाता है और FSSAI ने इसी को लेकर सवाल उठाए हैं। नियमों के अनुसार, किसी शराब के लेबल पर उसकी उम्र का दावा किया जाता है तो वह उस मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए। FSSAI की जांच में सामने आया है कि कंपनियां बहुत कम मात्रा में पुरानी स्पिरिट मिलाकर पूरी बोतल को एज्ड बताकर ज्यादा कीमत पर बेच रही हैं। इस तरह की लेबलिंग को भ्रामक और नियमों के खिलाफ बताया है।

FSSAI ने कंपनियों से इस मामले में जवाब मांगा है और पूछा है कि उनके खिलाफ FSS एक्ट, 2006 के तहत कार्रवाई क्यों ना की जाए। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर FSSAI इन कंपनियों के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई तो नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है या कुछ और सख्त कार्रवाई की जा सकती है।


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