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उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने परमार्थ निकेतन में की गंगा आरती

ऋषिकेश, उत्तराखण्ड। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता  सपरिवार परमार्थ निकेतन आये। परमार्थ पीठाधीश्वर, स्वामी चिदानन्द सरस्वती  महाराज के पावन सान्निध्य में विश्वविख्यात गंगा आरती में सहभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने माँ गंगा का पूजन-अर्चन कर राष्ट्र, समाज तथा समस्त मानवता के कल्याण हेतु प्रार्थना की।  स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने  मुख्य न्यायाधीश का रुद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर आत्मीय अभिनन्दन किया। 

इस अवसर पर भारत के अंतरिक्ष मिशन विक्रम-1 की सफल कक्षीय उड़ान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए  स्वामी  ने इसे भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता का स्वर्णिम अध्याय बताया हुये उन्होंने कहा कि विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय ही मानवता के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।  स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि देवभूमि है  प्राकृतिक सौन्दर्य से युक्त संयम, साधना, संगम और सनातन संस्कृति की अमर चेतना की धरती है। यही वह पुण्यभूमि है, जिसने युगों-युगों से सम्पूर्ण विश्व को आध्यात्मिक ऊँचाइयों का मार्ग दिखाया है। 

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हिमालय की पावन गोद से ही मानवता को वसुधैव कुटुम्बकम्, सर्वे भवन्तु सुखिनः और प्रकृति के साथ संतुलित सहअस्तित्व का दिव्य संदेश प्राप्त हुआ। ऋषियों, मुनियों और तपस्वियों की तपोभूमि उत्तराखण्ड ने विश्व को यह सिखाया कि वास्तविक प्रगति केवल भौतिक समृद्धि में नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति, करुणा, सद्भाव और सार्वभौमिक कल्याण में निहित है। यही कारण है कि आज भी यह पावन धरा विश्वभर के साधकों, चिंतकों और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा, शान्ति और आध्यात्मिक प्रकाश का अनन्त स्रोत बनी हुई है।

भारत ने एक बार फिर विश्व मंच पर अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और आत्मनिर्भरता का गौरवपूर्ण परिचय दिया है। विक्रम-1 की सफल कक्षीय उड़ान केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि यह भारत के युवाओं के अटूट संकल्प, दूरदर्शी सोच और अथक परिश्रम का जीवंत प्रतीक है। यह सफलता दर्शाती है कि जब सपनों को समर्पण, विज्ञान और नवाचार का साथ मिलता है, तब असंभव भी संभव हो जाता है।इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर समस्त वैज्ञानिकों, इंजिनियर्स एवं पूरी टीम को परमार्थ निकेतन की ओर से हार्दिक बधाई दी और आज की दिव्य गंगा आरती इस सफलता व भारती की समृद्धि को समर्पित की गयी। विज्ञान और अध्यात्म परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। विज्ञान हमें आकाश की ऊँचाइयों तक पहुँचने की क्षमता देता है, जबकि अध्यात्म उन ऊँचाइयों का सदुपयोग मानवता के कल्याण के लिए करने हेतु प्रेरित करता है।

भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि का समन्वय ही विकसित भारत की वास्तविक पहचान है। जब विज्ञान, संस्कार और संकल्प एक साथ आगे बढ़ते हैं, तब राष्ट्र नई ऊँचाइयों को प्राप्त करता है और विश्व के लिए प्रेरणा बनता है।यह उपलब्धि प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह हमारे युवाओं को बड़े सपने देखने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने की प्रेरणा देती है। ईश्वर से प्रार्थना है कि भारत का अंतरिक्ष अभियान निरंतर नई सफलताओं के शिखर को स्पर्श करता रहे तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मानवता के कल्याण, विश्व शांति और सतत विकास का माध्यम बनें। सम्पूर्ण टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर परमार्थ निकेतन की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ।

न्यायमूर्ति  मनोज कुमार गुप्ता  ने कहा कि परमार्थ निकेतन एक दिव्य आध्यात्मिक संस्थान है, आत्मिक शान्ति, सकारात्मक ऊर्जा और मानवीय मूल्यों का जीवंत केन्द्र है। यहाँ का दिव्य वातावरण, माँ गंगा का पावन तट और स्वामी चिदानन्द सरस्वती का सान्निध्य प्रत्येक आगंतुक को आन्तरिक शान्ति, प्रेरणा और नवीन ऊर्जा से भर देता है।

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