आकांक्षा शर्मा
शिक्षिका एवं लेखिका
बिसौली। हनुमान जी सिर्फ बल, विद्या और बुद्धि के दाता ही नही,बल्कि वे तो शक्ति, भक्ति और साहस के प्रतीक भी हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उनके जीवन में भी जन्म से ही चुनौतियाँ थी, किन्तु उन्होंने हर एक चुनौती का सामना किया इनका जन्म एक वानर रूप में हुआ, परन्तु उन्होंने अपने जीवन में कभी भी अपनी जाति या जन्म को कमजोरी नही बनने दिया। हनुमान जी को प्रभु श्री राम से मिलने के लिए भी बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होने कभी हार नही मानी। वे सदा ही श्री राम कि भक्ति में लीन रहे, और उनकी भक्ति की शक्ति से ही वे अनंतकाल से प्रभु श्री राम के भक्त हो गए। हनुमान जी ने हमेशा मेहनत से अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया। इस सबके साथ वे ऐसे एक मात्र है, जिनके सन्मुख उनका नाम लेने से नही बल्कि उनके प्रभु श्री राम का नाम लेने मात्र से वे प्रसन्न होकर असम्भव कार्य को भी सम्भव बना देते है। वर्तमान समय में प्रभु श्री राम एवं हनुमान जी के भक्त कहने को बहुत मिल जायेंगे, लेकिन यदि आदर्शो की बात की जाये तो न के बराबर ही कोई भक्त होगा। आज के समय में सबको सिर्फ अपना नाम चाहिए, कोई किसी दूसरे की सहायता के लिए हाथ बढ़ाता भी है तो पहले खुद का स्वार्थ देखता है। मेहनत करने से, लक्ष्य साधने से ज्यादातर लोग डरते है। सबसे बड़ी बात हर कोई अपनी शक्ति का प्रयोग दूसरे को डराने के लिए करता है, परन्तु हनुमान जी ने कभी ऐसा नही किया। यदि वे चाहते तो लंका से माता सीता को स्वयं ही ले आते, रावण को मार सकते थे। परन्तु उन्होंने ऐसा कुछ नही किया, क्योंकि वो संदेश देना चाहते थे, कि असाधारण शक्ति होने के बाद भी हमें उसका प्रयोग सोच समझकर करना चाहिए। साथ ही साथ उन्होंने संदेश दिया कि जिसे हम मानते है, उसका सिर्फ नाम लेना काफ़ी नही बल्कि उसकी बात को मानना, उसके आदर्शो पर चलना बड़ी बात है। हमें हमेशा अपने विवेक से काम लेना चाहिए। हमें हनुमान जी के जीवन से सीखना चाहिए और अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना डट कर करना चाहिए। हमें अपने बल का प्रयोग दूसरों को डराने के लिए नही, बल्कि दूसरों का डर दूर करने में प्रयोग करना चाहिए। सिर्फ अपना जीवन जय श्री राम और जय हनुमान के कहने तक सीमित न रखकर उनके आदर्शो को अपनाने में भी व्यतीत करना चाहिए। क्योंकि ज़ब हम सुधरेंगे, तभी जग सुधरेगा।











