20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान हुई झड़प को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की ओर से सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जुलाई को हुए बवाल में शामिल 2,873 लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड मिला है। इनमें 101 लोग हत्या के मामलों में आरोपी, 284 लोग डकैती और लूट के मामलों में दर्ज पाए गए हैं। 92 आरोपी ऐसे हैं, जिनपर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध समेत अन्य गंभीर मामले दर्ज हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस ने पुलिसकर्मियों पर हमले और गाड़ियों में तोड़फोड़ करने में शामिल कुल 2,873 अपराधियों की जांच की। इनकी पहचान FRS कैमरों, CCTV फुटेज, पुलिसकर्मियों और आम जनता द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो के जरिए की गई। बताया जा रहा है कि इन लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी और जांच जैसी कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे।
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आपराधिक रिकॉर्ड वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में 101 हत्या, 284 डकैती-लूट, 61 रेप, 25 छेड़छाड़, 6 POCSO, 229 आर्म्स एक्ट, 19 अपहरण और 67 NDPS मामलों के आरोपी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इनमें से कई लोगों के खिलाफ 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। जो मामले छात्रों के खिलाफ दर्ज हैं, उन्हें वापस ले लिया जाएगा।
तोड़फोड़ के बाद ही पुलिस ने किया बल का प्रयोग
रिपोर्ट के मुताबिक, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की इजाजत दी गई थी, न कि संसद तक मार्च करने की। एक सीनियर पुलिस अधिकारी का कहना है कि उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ना जारी रखा और संसद के बहुत करीब पहुंच गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में हड़कंप मच गया। पुलिस का कहना है कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जब प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक बैरिकेड्स तोड़ने का सिलसिला जारी रखा, तभी बल का प्रयोग किया गया।
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कई पुलिसकर्मी भी हुए हैं घायल
कार्रवाई के दौरान कई पुलिसकर्मी और अधिकारी भी हिंसा के दौरान हमले का शिकार हुए और घायल हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर रैंक के सीनियर अधिकारी और कई महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थे। साथ ही, लगभग 60 प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की खबर है। इस घटना के बाद पूरे मामले की समीक्षा शुरू की गई, जिसमें उन उपद्रवियों की भूमिका की भी जांच की गई जो पुलिस के अनुसार असली प्रदर्शनकारियों के बीच घुस आए थे।












