सारण । जयप्रकाश विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों के बीच अनिवार्य उपस्थिति के नए नियम को लेकर ठन गई है। विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए प्रतिदिन सात घंटे की उपस्थिति अनिवार्य किए जाने के विरोध में आज विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन किया। ,
मामले की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 को हुई, जब कुलसचिव प्रो डॉ नारायण दास ने कुलपति के निर्देश पर एक पत्र जारी किया। इस पत्र के अनुसार, कुलपति द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में शिक्षकों व कर्मचारियों की उपस्थिति असंतोषजनक पाई गई थी। दो अप्रैल से सभी अंगीभूत महाविद्यालयों और मुख्यालय में सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई।
प्रशासन का तर्क है कि शैक्षणिक गुणवत्ता और कार्य संस्कृति में सुधार के लिए यह कदम जरूरी है। धरना दे रहे शिक्षकों ने इस आदेश को तानाशाही करार देते हुए कहा कि यह लोकभवन, बिहार के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार लोकभवन के नियमानुसार शिक्षकों के लिए प्रतिदिन 5 घंटे की उपस्थिति और वर्ष में न्यूनतम 180 कार्य दिवस निर्धारित हैं। विश्वविद्यालय ने बिना किसी पूर्व विमर्श के इस समय सीमा को बढ़ाकर सात घंटे कर दिया है।शिक्षकों का आरोप है कि इस निर्णय से शोध कार्य और शैक्षणिक वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि यदि यह अवैध आदेश तत्काल वापस नहीं लिया गया तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन अपने निर्णय पर अडिग है, जिससे परिसर में गतिरोध और तनाव की स्थिति बनी हुई है। छात्र कक्षाएं सुचारू रूप से चलने का इंतजार कर रहे हैं जबकि शिक्षक गेट पर डटे हुए हैं।










