लखनऊ। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) से होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए संडीला, हरपालपुर, पिहानी और बिलग्राम प्रथम संदर्भन इकाइयों (एफआरयू) में इंजेक्शन एफसीएम की सुविधा शुरू की गई है। जो की गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर ड्रिप के माध्यम से दिया जाता है इस इंजेक्शन का प्रयोग पूर्णतया सुरक्षित है एवं कोई दुष्प्रभाव देखने में नहीं आया है इस पहल का उद्देश्य गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को प्रभावी एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराना है।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. भवनाथ पांडे ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत पिछले माह सण्डीला एफआरयू से की गई थी, जहां चार जून 2026 तक 13 गर्भवती महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाया जा चुका है। पिहानी एफआरयू में 26 मई से शुरू हुई इस सुविधा का लाभ अब तक 18 गर्भवतियों ने लिया है, जबकि हरपालपुर एफआरयू में 3 जून से शुरू हुई सेवा के तहत अब तक 4 गर्भवती महिलाओं को इंजेक्शन दिया गया है। बिलग्राम एफआरयू में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि एनीमिया गर्भवती महिला और उसके होने वाले शिशु, दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। एफसीएम इंजेक्शन की उपलब्धता से गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को समय पर उपचार मिल सकेगा, जिससे प्रसव संबंधी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि पात्र गर्भवती महिलाओं को यह सुविधा प्रशिक्षित चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों की निगरानी में सुरक्षित रूप से उपलब्ध कराई जाए।
सीएमओ ने बताया कि गर्भावस्था में एनीमिया का एक प्रमुख कारण आयरन की कमी है। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार एफसीएम एक सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है। इस संबंध में चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्सों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है,ताकि उपचार प्रक्रिया को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।
गर्भवतियों के उपचार में एफसीएम इंजेक्शन की एक डोज पर्याप्त
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