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बस्ती में भारत स्वाभिमान न्यास एवं पतंजलि योग समिति, बस्ती ने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से योग सूत्र के प्रणेता महर्षि पतंजलि की पावन जन्मस्थली कोंडर गांव तथा वहां स्थित ऐतिहासिक झील को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग स्मारक’ के रूप में विकसित एवं घोषित किए जाने की मांग की है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सामूहिक योग साधना एवं वैदिक यज्ञ-अनुष्ठान के दौरान यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। आजीवन सदस्य राजेश श्रीवास्तव ‘कैलाशी’ द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का उपस्थित योग साधकों एवं पदाधिकारियों ने जोरदार समर्थन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत स्वाभिमान ट्रस्ट (बस्ती) के जिला प्रभारी ओम प्रकाश आर्य ने कहा कि महर्षि पतंजलि ने पूरी दुनिया को योग और आरोग्य का अमूल्य मार्ग प्रदान किया। उनकी जन्मस्थली और वहां स्थित ऐतिहासिक झील आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हैं। यदि इसे अंतर्राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलता है तो यह स्थान वैश्विक योग पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। पतंजलि योग समिति के महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र त्रिपाठी ने सरकार से इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण, जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की मांग की। भारत स्वाभिमान समिति के महामंत्री डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि जब पूरा विश्व योग संस्कृति का सम्मान कर रहा है, तब महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली की उपेक्षा उचित नहीं है। जिला प्रभारी सुभाष चन्द्र आर्य ने इसे महर्षि पतंजलि के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया। कार्यक्रम का संचालन योगाचार्य गरुण ध्वज पाण्डेय ने किया। उन्होंने कहा कि योगऋषि स्वामी रामदेव के मार्गदर्शन में तैयार हुए योग शिक्षक देश-विदेश में निरोगी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने गुरुदक्षिणा अर्पित की। इस अवसर पर नवल किशोर चौधरी, श्रीमती कामना पाण्डेय, राम मोहन पाल, श्रवण कुमार, अवधेश पाण्डेय, राम यज्ञ मिश्र, रत्नेश मिश्र, डॉ. शशिकला श्रीवास्तव, शन्नो दुबे, रजनी मिश्रा सहित सैकड़ों योग साधक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली को अंतर्राष्ट्रीय योग स्मारक घोषित करने:बस्ती में भारत स्वाभिमान न्यास और पतंजलि योग समिति ने प्रस्ताव पारित किया
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