HomeHealth & Fitnessपरिवहन मंत्री ने जिसे किया सम्मानित, दर-दर भटक रहा वो कंडक्टर!

परिवहन मंत्री ने जिसे किया सम्मानित, दर-दर भटक रहा वो कंडक्टर!

  • अलग-अलग डिपो के तीन दर्जन से अधिक आउटसोर्स कंडक्टरों ने सुनायी अपनी पीड़ादायक आपबीती
  • बोले, महिला कंडक्टरों को संविदा पर रखा जा रहा, जबकि उन्हें आउटसोर्सिंग के हवाले कर दिया गया

लखनऊ। शुक्रवार का दिन और दोपहर बाद के तीन बजे होंगे, स्थान यूपी रोडवेज का मुख्यालय और वहां उसके ठीक गेट पर एक ओर बड़ी संख्या में तमाम युवा एकजुट होकर अपनी कुछ मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से नारे लगा रहे थे। एकबारगी तो यही लगा कि क्या लखनऊ में भी कुछ काक्रोच जनता पार्टी जैसा आंदोलन शुरू होने वाला है क्या, पूछने पर पता चला कि ये सभी प्रदेश के अलग अलग रोडवेज डिपो से आज राजधानी लखनऊ आये हैं। 

ये सभी आउटसोर्सिंग पर रखे गये कंडक्टर हैं, जोकि अपने को संविदा पर रखे जाने की मांग को लेकर निगम मुख्यालय पहुंचे थे। इनमें से एक ने बताया कि भाई जी, एमडी साहब तक सूचना पहुंची तो वहां से यही जवाब आया कि आप लोग सोमवार तक आईये और इस प्रकरण को देखा जा रहा। इसमें भी सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला वो रूपईडीहा का वो युवा आउटसोर्स कंडक्टर रहा, जिसे पिछले दिनों एक कार्यक्रम में खुद सीएम योगी की मौजूदगी में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने प्रदेश के सभी रीजनों व डिपो में बतौर कंडक्टर सर्वाधिक आय अर्जित करने पर बकायदा विशेष रूप से सम्मानित किया गया था, जिसका सर्टिफिकेट आज भी उसके पास सुरक्षित रखा है।

हालांकि अभी वो प्रमाण पत्र उसे उक्त विभागीय पीड़ा से निजात नहीं दिला सकता। इसी प्रकार अन्य डिपो के आउटसोर्स कंडक्टरों का यही कहना रहा चूंकि महिला कंडक्टरों को संविदा पर रखा जा रहा, जबकि उन्हें दरकिनार करते हुए आउटसोर्स के तर्ज पर रखा जा रहा। इनके मुताबिक संविदा कंडक्टरों को प्रति किमी दो रुपये कुछ पैसे जबकि आउटसोर्स इससे कहीं कम एक रुपये कुछ पैसे के भुगतान से संतोष करना पड़ता है।

महिला-पुरुष कंडक्टरों में भेदभाव नहीं होना चाहिये: दयाशंकर

daya0111
इस प्रकरण पर जब तरूणमित्र टीम ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से बात की तो पहले उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की कि इतने युवा साथी मुख्यालय पहुंचे, विरोध किये और उन्हें सूचना तक नहीं दी गयी, फिर पूरे मामले को सुना और समझा और अंतत: बोले कि इसमें श्रम विभाग से जुड़े एक जीओ का कुछ विषय है, मगर फिर भी महिला व पुरूष कंडक्टरों के भुगतान में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिये, इस मामले को गंभीरता से दिखवाता हूं। 

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments