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बस्ती में सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। इसके साथ ही तटीय गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा गहराने लगा है। मांझा क्षेत्र में नदी लगातार किनारों को काट रही है और पानी धीरे-धीरे निचले इलाकों की ओर बढ़ रहा है। फिलहाल बाढ़ का पानी आबादी तक नहीं पहुंचा है, लेकिन तटवर्ती गांवों के किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। सरयू की तेज धारा उपजाऊ कृषि भूमि, पेड़-पौधों और खड़ी फसलों को लगातार अपनी चपेट में ले रही है। कई गांवों में कटान की रफ्तार बढ़ने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। पशुओं के चारे का संकट गहराया बाढ़ के खतरे के बीच पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। किसानों का कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ने से हरा चारा लाना मुश्किल हो जाएगा और जल्द ही नाव के सहारे चारा लाने की नौबत आ सकती है। इससे पशुपालन पर भी संकट गहराने की आशंका है। बाढ़ चौकियां अलर्ट, तटबंधों की निगरानी तेज केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या के अनुसार शुक्रवार शाम पांच बजे सरयू नदी का जलस्तर 91.950 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 92.73 मीटर से 78 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए दुबौलिया क्षेत्र के कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खलवा और गौरा-सैफाबाद तटबंध पर पारा गांव की बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। बाढ़ खंड के अधिकारी संवेदनशील तटबंधों और कटान प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कुछ गांवों में घरों तक पहुंची नदी, ग्रामीणों ने मांगी कार्रवाई विक्रमजोत क्षेत्र के पकड़ी संग्राम, अर्जुनपुर और लकड़ी पांडेय गांवों में कटान सबसे अधिक तेज हो गई है। ग्रामीणों के मुताबिक कई जगह नदी घरों से महज 10 से 15 मीटर की दूरी तक पहुंच गई है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल कटानरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी संख्या में मकान और उपजाऊ जमीन सरयू में समा सकती है।
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बस्ती में फिर चढ़ने लगी सरयू:कटान तेज, गांवों पर मंडराने लगा खतरा; किसानों को चारे की चिंता सताने लगी
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