वाराणसी । उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दृश्य कला संकाय के बी.एफ.ए. प्रथम वर्ष के 30 छात्र-छात्राओं की अपनी मौलिक कलाकृतियों की प्रदर्शनी ‘नवसर्जना’ को साथी छ़ात्रों के साथ कला प्रेमी भी सराह रहे है। संकाय के अहिवासी कला वीथिका में प्रदर्शित ये कलाकृतियां विद्यार्थियों ने अपने नियमित शैक्षणिक कार्यों और असाइनमेंट के अतिरिक्त समय निकालकर सृजित की हैं। प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. सुरेश चंद्र जांगिड़ ने मंगलवार को बताया कि ‘नवसृजना’ का उद्देश्य नवागंतुक छात्र-कलाकारों की रचनात्मकता और जलरंग के माध्यम से उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति को एक मंच प्रदान करना है।यद्यपि यह इन विद्यार्थियों के लिए सीखने और नए कौशल को निखारने का समय है, फिर भी उन्होंने कला निर्माण के तकनीकी पहलुओं में अपनी गहरी समझ और सक्षमता का परिचय दिया है। अधिकांश छात्र विशेष रूप से दृश्य चित्रों में प्रकाश और छाया के जादुई खेल से प्रभावित दिखे। वहीं, कुछ छात्रों ने भारत कला भवन संग्रहालय की प्राचीन मूर्तियों के सूक्ष्म विवरणों को अपनी कला के माध्यम से उकेरा है। अनुपम शर्मा ने व्यक्ति चित्रण के माध्यम से मानवीय भावनाओं और मूड को बखूबी दर्शाया है। वहीं, निरुपम राॅय ने वॉटरकलर लैंडस्केप में सूक्ष्म विवरणों को बड़ी बारीकी से तराशा है। नम्रता पाल ने ‘एंटीक स्टडी’ के माध्यम से प्राचीनता के प्रति अपना रुझान दिखाया है। इस प्रदर्शनी में अंजलि गुप्ता, शौविक, सुमित, पीयूष, सतीश, अंजलि विश्वकर्मा, सूरज, शिवा जी, अंकिता, कीर्ति, तनु, श्रेया, आलोक, साक्षी, पूजा, शिवराज, सोनू, अंजलि यादव, आर्यन, प्रिवेश, प्रगति, सपना, चांदोसाकी, कंचन, अंकित, रवि और हर्ष जैसे प्रतिभावान छात्र शामिल हैं। डॉ सुरेश ने बताया कि तीन दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन बीते सोमवार को कला इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा और भारत कला भवन के उप-निदेशक डॉ. निशांत और दृश्य कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. उत्तमा दीक्षित ने किया था। आठ अप्रैल बुधवार तक प्रदर्शनी का अवलोकन कला प्रेमी पूर्वांह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच अहिवासी कला वीथिका में कर सकते है।
बीएचयू के दृश्य कला संकाय में ‘नवसर्जना’ कला प्रदर्शनी,30 युवा कलाकारों की प्रतिभा का संगम
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