बस्ती जनपद के रुधौली विकासखंड में पंचायत व्यवस्था की हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। यहां 75 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी महज 8 सचिवों के कंधों पर डाल दी गई है, लेकिन स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर है। सूत्रों की माने तो 11 सचिवों में भी कोई कार्यालय अटैच है, कोई कैजुअल लीव पर, कोई बीमारी की वजह से छुट्टी पर है, तो कोई पारिवारिक कारणों से अनुपस्थित अथवा छुट्टी पर है। ऐसे में वास्तविक रूप से पंचायतों में काम करने वाले सचिवों की संख्या और भी कम हो जाती है।

सरकार द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में सचिव और लेखपाल की नियमित मौजूदगी अनिवार्य की गई है, ताकि ग्रामीणों को उनके गांव में ही सुविधाएं मिल सकें। लेकिन रुधौली में यह व्यवस्था पूरी तरह धराशायी नजर आ रही है। कई सप्ताह बीत जाने के बावजूद सचिव पंचायत भवन तक नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे ग्राम पंचायतों का विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
इस लापरवाही का खामियाजा सीधे ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर की नकल जैसे जरूरी कार्यों के लिए लोगों को आज भी 20 से 35 किलोमीटर दूर ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। बार-बार आने-जाने में समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है, लेकिन इसके बावजूद काम समय पर नहीं हो पा रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर कामकाज ठप पड़ा है और अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
यह स्थिति साफ दर्शाती है कि रुधौली विकासखंड में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यदि जल्द ही सचिवों की तैनाती और उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई, तो ग्रामीणों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब जागता है और क्या कार्रवाई करता है।











