- प्रदीप कुमार दुबे पर न्यायालय आदेशों का उल्लंघन करने का आरोप
लखनऊ। शुक्रवार विधानसभा अध्यक्ष के पूर्व सूचना अधिकारी रहे कर्मेश प्रताप सिंह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे के खिलाफ हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। जानकारी के अनुसार कर्मेश प्रताप सिंह ने हजरतगंज थाना पहुंचकर तहरीर सौंपी। शिकायत में प्रमुख सचिव के विरुद्ध विभिन्न आरोप लगाए गए हैं।
विधानसभा अध्यक्ष के पूर्व सूचना अधिकारी रहे कर्मेश प्रताप सिंह का कहना है कि वर्ष 2009 में दुबे की नियुक्ति विधानसभा सचिवालय (भर्ती एवं सेवा शर्तें)नियमावली, 1974 की अनदेखीकरते हुए की गई थी। नियमावली के अनुसार चयन श्रेणी के पदों पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु 52 वर्ष निर्धारित थी, जबकि नियुक्ति के समय उनकी आयु इससे अधिक थी।
दुबे ने 13 जनवरी 2009 को उप्र न्यायिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ली थी। उसी दिन उन्हें प्रमुख सचिव (संसदीय कार्य) नियुक्त किया गया और छह दिन बाद, 19 जनवरी 2009 को विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव का प्रभार भी सौंप दिया गया। यह पूरी प्रक्रिया बिना विज्ञापन, प्रतिस्पर्धी चयन, लोक सेवा आयोग से परामर्श तथा संविधान के अनुच्छेद-187 के तहत आवश्यक अनुमोदन के पूरी की गई।
याचिका में वर्ष 2010-11 में विधानसभा सचिवालय सेवा नियमों में किए गए कथित पांचवें संशोधन पर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि इन संशोधनों को विधानसभा के पटल पर रखा ही नहीं गया और इन्हीं के आधार पर दुबे को लगातार सेवा विस्तार दिया गई जाता रहा।
वर्ष 2011 में लागू की ‘सर्विस ट्रांसफर’ व्यवस्था को भी नियमों के विपरीत बताते हुए कहा गया है कि इसी के माध्यम से उनकी स्थिति नियमित करने का प्रयास किया गया। दुबे 30 अप्रैल 2019 को 62 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो चुके थे। बाद में 17 मार्च 2020 को जारी अधिसूचना के तहत सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष किए जाने का लाभ भी उन्हें नहीं मिल सकता था। इसके बावजूद वह आज भी प्रमुख सचिव पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी आयु 68 वर्ष से अधिक बताई गई है। दुबे को प्रमुख सचिव पद पर बने रहने का कानूनी अधिकार सिद्ध करने का निर्देश देने के लिए हाई कोर्ट से क्वो वारंटो रिट जारी करने की मांग की गई है।












