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खेती बदलने का संदेश लेकर गांव पहुंचा कृषि विभाग:सिद्धार्थनगर में किसानों को सिखाए उन्नत तरीके, मिट्टी बचाने और लागत घटाने पर जोर


सिद्धार्थनगर में बदलते कृषि परिदृश्य में किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती से जोड़ने के उद्देश्य से बुधवार को जोगिया ब्लॉक की ग्राम पंचायत गायघाट में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम और शिविर आयोजित किया गया। कृषि विभाग की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को उन्नत खेती, मृदा संरक्षण, बीज शोधन और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी गई। बड़ी संख्या में किसानों ने इसमें भाग लेकर वैज्ञानिक खेती अपनाने का संकल्प लिया। ‘विकसित कृषि संकल्प’ के तहत लगा जागरूकता शिविर उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग की ओर से यह कार्यक्रम ‘विकसित कृषि संकल्प’ और ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत आयोजित किया गया। शिविर का आयोजन कृषि रक्षा अनुभाग, सिद्धार्थनगर के सौजन्य से किया गया, जिसमें स्थानीय किसानों को खेती से जुड़े नए उपाय बताए गए। आधुनिक खेती और मिट्टी संरक्षण पर दिया गया जोर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और मृदा संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा। अधिकारियों ने बताया कि बेहतर उत्पादन के लिए मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना और संसाधनों का संतुलित उपयोग जरूरी है। खेत बचाओ अभियान में रसायनों के संतुलित उपयोग की सलाह ‘विशेष सघन खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के संतुलित उपयोग की जानकारी दी गई। इसके साथ प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई। खरीफ से पहले समझाया गया बीज शोधन का महत्व ‘बीज शोधन अभियान – स्वस्थ बीज, समृद्ध किसान’ के अंतर्गत कृषि अधिकारियों ने खरीफ फसलों की बुवाई से पहले बीज उपचार के फायदे बताए। उन्होंने कहा कि बीज शोधन से शुरुआती रोगों और कीटों से फसलों की सुरक्षा में मदद मिलती है। जैविक कार्बन बढ़ाने पर विशेष फोकस ‘कृषि मूलस्य जीवाश्म’ अभियान के तहत मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि स्वस्थ मिट्टी भविष्य की उत्पादक खेती की आधारशिला है। किसानों ने योजनाओं की जानकारी लेकर लिया संकल्प कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया। अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनकर विभागीय योजनाओं और अनुदान संबंधी जानकारी साझा की। ग्रामीणों ने वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन और आय बढ़ाने का संकल्प लिया।

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