झारखंड के रहने वाले 17 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने इंटरनेट पर एक लेख लिखकर सीबीएसई के एक बड़े फैसले पर सवाल उठाए हैं। सार्थक ने सरकारी कागज निकालकर बताया कि सीबीएसई ने बच्चों की कॉपियां चेक करने का काम ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ नाम की कंपनी को दिया है। उसका कहना है कि इस कंपनी को काम देने के लिए नियमों को बदला गया। इस मामले पर राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल जैसे बड़े नेताओं ने भी सरकार से सवाल पूछे हैं।
सार्थक इस साल खुद 12वीं क्लास का छात्र था और उसने यह परीक्षा दी थी। जब रिजल्ट आया तो बहुत से बच्चों के नंबर कम थे और बच्चों ने शिकायत की कि उनकी कॉपियां ठीक से चेक नहीं की गई। जब सार्थक ने इंटरनेट पर अपनी खुद की कॉपी देखी तो उसके पन्ने भी बहुत धुंधले थे और ठीक से दिखाई नहीं दे रहे थे। सार्थक ने इसके पीछे की वजह जानने का फैसला किया। उसने इंटरनेट पर सीबीएसई के करीब 576 टेंडर दस्तावेज निकाले और कई दिनों तक उन्हें ध्यान से पढ़ा। इसके बाद उसने अपने ब्लॉग पर एक लेख लिखा कि कैसे सीबीएसई ने नियमों को बदलकर एक कंपनी को फायदा पहुंचाया।
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कंप्यूटर से कॉपी चेक करने का सिस्टम
सीबीएसई कॉपियों को कंप्यूटर की स्क्रीन पर चेक करने के लिए एक नया सिस्टम लाया था। इस काम को संभालने के लिए हैदराबाद की ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ नाम की कंपनी को चुना गया। सार्थक ने खोजा कि इस कंपनी को काम देने के लिए तीन बार टेंडर निकाला गया था। पहला टेंडर फरवरी 2025 में निकाला गया था, पर बाद में उसे सरकारी वेबसाइट से पूरी तरह हटा दिया गया और इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। दूसरा टेंडर मई 2025 में निकाला गया जिसमें देश की बड़ी कंपनियों ने भी हिस्सा लिया लेकिन सीबीएसई ने सबको फेल बताकर इसे रद्द कर दिया। इसके बाद अगस्त 2025 में तीसरा टेंडर निकाला गया और इसमें कोएम्प्ट कंपनी को चुन लिया गया।
नियमों में बदलाव के दावे
सार्थक ने बताया कि दूसरे और तीसरे टेंडर के बीच नियमों में कम से कम 15 बड़े बदलाव किए गए ताकि कोएम्प्ट कंपनी को आसानी से काम मिल सके। पुराने नियमों से यह बात हटा दी गई कि खराब काम करने वाली कंपनी को बाहर कर दिया जाएगा। पहले नियम था कि जो कंपनी पहले कभी बैन हुई हो वह हिस्सा नहीं ले सकती पर नए नियम में इसे बदलकर ‘अभी ब्लैकलिस्ट’ कर दिया गया। टेंडर के लिए कंपनी की कमाई कम से कम 50 करोड़ रुपये होनी जरूरी थी और कोएम्प्ट कंपनी इस आंकड़े के बिल्कुल करीब थी। इसके अलावा गलत काम पर मिलने वाली सजा का समय आधा कर दिया गया और सॉफ्टवेयर की सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियमों को भी बहुत ढीला कर दिया गया।
कोएम्प्ट एडुटेक का पुराना नाम ‘ग्लोबारेना टेक्नोलॉजीज’ था। साल 2019 में तेलंगाना राज्य में जब इस कंपनी ने परीक्षा का रिजल्ट निकाला था तो इसके सिस्टम में बड़ी खराबी आई थी। उस समय रिजल्ट खराब होने की वजह से दुखी होकर 23 छात्रों ने अपनी जान दे दी थी। सार्थक ने अपने ब्लॉग में यह सवाल उठाया कि ऐसी विवादित कंपनी को सीबीएसई ने दोबारा देश के लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खेलने का मौका क्यों दिया।
नेताओं के बयान
सार्थक का ब्लॉग सामने आने के बाद देश के बड़े नेताओं ने भी इस पर अपनी बात रखी। कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने इस ब्लॉग को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया और ब्लॉग कि सार्थक ने बड़ी बहादुरी से शिक्षा मंत्री के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने इस मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया और कोर्ट से इसकी पूरी जांच करने की मांग करते हुए नए जमाने के बच्चों की तारीफ की। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी लोगों से इस ब्लॉग को पढ़ने को कहा और आरोप लगाया कि सरकार ने एक संदिग्ध कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियम बदले और बच्चों की भविष्य दांव पर लगाया।
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सीबीएसई के आंकड़े
इस विवाद के बाद सीबीएसई के खुद के आंकड़ों के पता चला कि इस साल पूरे 98 लाख से ज्यादा कॉपियां कंप्यूटर पर चेक की गई। इनमें से 68 हजार से ज्यादा कॉपियां इतनी धुंधली स्कैन हुई थीं कि दोबारा स्कैन करना पड़ा। वहीं 13 हजार से ज्यादा कॉपियां बार-बार स्कैन करने के बाद भी पढ़ी नहीं जा सकी इसलिए उन्हें मजबूरी में हाथों से चेक करना पड़ा। सार्थक का कहना है कि वह कंप्यूटर पर कॉपी चेक करने के नए सिस्टम के खिलाफ नहीं है और इसे अच्छा मानता है लेकिन इसे पूरे देश में लागू करने से पहले छोटे स्तर पर टेस्ट करना चाहिए था। वह चाहता है कि सीबीएसई उसके उठाए सवालों का जवाब दें ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।












