नई दिल्ली/बीजिंग। भारत और जापान के बीच बढ़ते सहयोग पर चीन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि दोनों देशों की साझेदारी का उद्देश्य किसी तीसरे देश, विशेषकर चीन को निशाना बनाना नहीं होना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और जापान ने अहम खनिजों और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
सिंगापुर की प्रमुख समाचार नेटवर्क सीएनए (चैनल न्यूज़ एशिया) के अनुसार चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने शुक्रवार को कहा कि दाेनाें देशों के बीच सहयोग आपसी समझ और भरोसे को बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि किसी तीसरे पक्ष के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह का गठबंधन या सहयोग टकराव बढ़ाने का कारण नहीं बनना चाहिए।
यह टिप्पणी उस बैठक के बाद आई जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच नई दिल्ली में अहम खनिजों, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इन खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन और रक्षा उपकरणों में व्यापक रूप से होता है।
चीन और जापान के बीच संबंध हाल के वर्षों में ताइवान मुद्दे और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं। बीजिंग ने जापान की उस टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई थी जिसमें संभावित ताइवान संकट की स्थिति में सैन्य हस्तक्षेप की बात कही गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने हाल ही में कुछ जापानी कंपनियों को एक्सपोर्ट प्रतिबंध सूची में शामिल किया है, जिसे टोक्यो ने “अस्वीकार्य और खेदजनक” बताया है और इसे वापस लेने की मांग की है।
इस बीच, भारत और जापान दोनों ने कहा है कि वे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने पर काम कर रहे हैं।












