HomeHealth & Fitnessसाथियों ने सराहा,आईपीएस अधिकारियों की उखड़ने लगी सांसे !

साथियों ने सराहा,आईपीएस अधिकारियों की उखड़ने लगी सांसे !

पीड़ित सिपाही पर कार्रवाई होना तय,जांच शुरू  
सिपाही ने दूसरा वीडियो जारी कर कहा आरोपियों को ही सौंपी जांच  

लखनऊ। गुरूवार सोशल मीडिया पर लखनऊ पुलिस पर भ्र्ष्टाचार का आरोप लगाते हुए सिपाही ने एक वीडियो जारी किया था। यह वीडियो जमकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। विपक्षी पार्टी ने भी सरकार को आड़े हाथ ले लिया। वहीं इस वीडियो को लेकर सिपाही और दारोगा रैंक के कर्मचारियों ने सिपाही को जमकर सराहा है। वीडियो सामने आने के बाद लखनऊ पुलिस ने जांच एडीसीपी लाइंस को सौंप दी।

वहीं इस मामले में सिपाही ने दूसरा वीडियो जारी कर कहा कि जिस पर आरोप है,उसे ही जांच दी गई। इस दूसरे वीडियो के बाद उच्च अधिकारियों की मानो सांसे उखड़ने लगी हों। दूसरा वीडियो सामने आने के बाद लखनऊ पुलिस ने सिपाही को रूल्स और मैनुअल्स की चेतावनी दे डाली है। चर्चा चल रही है कि निष्पक्ष जांच तो शायद ही होगी पहले सिपाही पर गाज गिरेगी। 

गौरतलब है कि गुरूवार वीडियो जारी करते हुए कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला ने आरोप लगाया था कि रिजर्व पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने के नाम पर पुलिसकर्मियों से हर महीने अवैध वसूली की जाती है। गार्ड कमांडर के माध्यम से सिपाहियों और दीवानों से करीब दो हजार रुपए प्रति माह लिए जाते हैं। कहा था कि पुलिस विभाग को काले अंग्रेज चला रहे हैं। गणना प्रभारी, आरआई और अन्य अधिकारी इस व्यवस्था में शामिल हैं। वसूली की रकम नीचे से ऊपर तक अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है।

कांस्टेबल ने दावा किया कि लखनऊ कमिश्नरेट में एक डेटा सेक्शन में 110 से 120 गार्ड तैनात हैं, जहां 500 से 550 ड्यूटी लगाई जाती हैं। आरोप है कि करीब 400 पुलिसकर्मियों से हर महीने दो-दो हजार रुपए वसूले जाते हैं, जिससे लगभग 8 लाख रुपये की उगाही होती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी वसूली कई अन्य जगहों पर भी की जा रही है। वीडियो में कांस्टेबल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के भीतर से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है, इसलिए सरकार को सीधे कार्रवाई करनी चाहिए।

जिसके बाद लखनऊ पुलिस का बयान आया था कि इस मामले को संज्ञान लेते हुए लखनऊ पुलिस कमिश्नर ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। पुलिस कमिश्नरेट ने सफाई देते हुए कहा है कि ड्यूटी लगाने के लिए निर्धारित एसओपी का पालन किया जाता है,जिसकी मॉनिटरिंग राजपत्रित अधिकारी करते हैं। पूरे मामले की जांच एडीसीपी पुलिस लाइन को सौंपी गई है। वहीं शुक्रवार सिपाही ने वीडियो जारी करते हुए कहा है कि जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं वही इस मामले की जांच भी कर रहे हैं। 

पुलिस ने रूल्स और मैनुअल्स का दिया हवाला 

इस मामले में लखनऊ पुलिस ने पुलिस रूल्स एन्ड मैनुअल्स का हवाला देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत प्रत्येक पुलिसकर्मी की शिकायतों के निवारण हेतु विभाग में एक सुस्थापित एवं प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विद्यमान है। विभिन्न स्तरों पर की गई किसी भी शिकायत पर गंभीरता से संज्ञान लिया जाता है। प्रस्तुत प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रारम्भ कर दी गई है एवं जांच की निष्पक्षता को बनाए रखने हेतु पुलिस लाइन का पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों से पृथक अधिकारियों को जांच सुपुर्द की गई है। साथ ही, उत्तर प्रदेश पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी के अंतर्गत समस्त पुलिसकर्मियों को विभागीय मामलों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से स्पष्टतः निषिद्ध किया गया है। शिकायत के लिए विभागीय चैनल उपलब्ध हैं – सोशल मीडिया उसका माध्यम नहीं है। इस संबंध में भी नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। उत्तर प्रदेश पुलिस एक अनुशासित बल है तथा विभागीय नियमों एवं मर्यादाओं का पालन सभी स्तरों पर समान रूप से अपेक्षित है। 

 

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