- अवध बार एसोसिएशन के महासचिव होंगे नए पार्षद
लखनऊ। गुरुवार कोर्ट ने मेयर की शक्तियां फ्रीज कर दी। जिसके बाद नगर निगम मुख्यालय का पारा चढ़ा हुआ है। सपा पार्षद को शपथ न दिलाने पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। सपा पार्षद को शपथ न दिलाने पर बीजेपी मेयर के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज कर दिए। आरोप है कि इस पूरे मामले में कोर्ट ने दिसंबर 2025 में आदेश दिया था। आरोप है कि इसके बावजूद बीजेपी मेयर सुषमा खर्कवाल कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करती रही। जिसके बाद गुरुवार कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए मेयर की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां फ्रीज कर दी हैं। हालांकि माना जा रहा है इस कदम के बाद मेयर अब पार्षद को शपथ दिला देंगी।
जानकारी के मुताबिक मामला लखनऊ के वार्ड संख्या-3 फैजुल्लागंज से जुड़ा है। सत्र अदालत ने सपा के ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद पर निर्वाचित घोषित किया था। इसके 5 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने साफ किया है कि जब तक सपा पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज रहेंगे। उनका सारा काम डीएम और नगर आयुक्त देखेंगे। लखनऊ नगरीय निकाय चुनाव-2023 के दौरान भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला उर्फ टिंकू शुक्ला और सपा प्रत्याशी ललित तिवारी के बीच सीधा मुकाबला हुआ था।
मतगणना में प्रदीप कुमार शुक्ला को 4,972 और ललित तिवारी को 3,298 वोट मिले थे। इस आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला को निर्वाचित घोषित कर दिया गया था। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सपा प्रत्याशी ललित तिवारी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें आरोप लगाया था कि भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाचन प्रपत्रों में कुछ जरूरी जानकारियां नहीं दी थीं। ये जानकारियां देना कानूनन जरूरी था।
याचिका में यह भी कहा गया था कि नामांकन प्रक्रिया में की गई यह चूक चुनावी नियमों का उल्लंघन है। इसे कदाचार की श्रेणी में माना जाना चाहिए। इसी आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। साथ ही चुनाव परिणाम निरस्त करने की मांग की गई थी। वार्ड-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) के पार्षद का विवाद 13 मई, 2023 को लखनऊ के अपर जिला जज की कोर्ट तक पहुंचा था।
करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने निर्वाचन के समय दाखिल एफिडेविट, शपथ पत्र और निर्वाचन फार्म की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने उपलब्ध दस्तावेजों, तथ्यों और दलीलें देखीं। इसमें पाया कि नामांकन के दौरान जरूरी जानकारी न देना गंभीर अनियमितता है। इससे चुनाव की वैधता प्रभावित होती है। इसी आधार पर कोर्ट ने प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया था। साथ ही ललित तिवारी को वार्ड-73 से निर्वाचित घोषित कर दिया था। पार्षद ललित किशोर ने बताया कि निर्वाचित होने के बावजूद उनको शपथ नहीं दिलाई गई। इस संबंध में उन्होंने न्यायाधिकरण को बताया कि 19 दिसंबर, 2025 को उनको निर्वाचित घोषित किया था, लेकिन शपथ नहीं दिलाई गई है। इस बीच पूर्व निर्वाचित सदस्य अभी भी अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि जिला मजिस्ट्रेट ने 23 जनवरी और 10 फरवरी, 2026 को नगर आयुक्त, लखनऊ को निर्वाचन न्यायाधिकरण के फैसले की जानकारी दी थी। उन्होंने धारा 85 के तहत शपथ दिलाने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार ने भी 4 फरवरी, 2026 को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। 12 मई को एक बार फिर हाईकोर्ट ने ललित तिवारी को एक सप्ताह में शपथ दिलाने का आदेश दिया था।
इस पर भाजपा के प्रदीप कुमार शुक्ला की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसे कोर्ट ने रद्द किया था। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट ने लखनऊ मेयर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देने के आदेश दिए थे।
बीजेपी पार्षद का चुनावी जीत हुई शून्य
कोर्ट के जरिये लम्बी लड़ाई जीतकर कोर्ट के आदेश पर पार्षद का चुनाव जीतने वाले ललित किशोर तिवारी ने तरुणमित्र से बातचीत करते हुए बताया कि बीजेपी पार्षद ने चुनाव में फ्राड करते हुए झूठा शपथ पत्र दाखिल किया था। जिसमें न तो उनकी कोई पत्नी है, न कोई बच्चे हैं,न कोई सम्पत्ति और न ही कोई वाहन है। शपथ पत्र में यह सब स्थान खाली छोड़ा गया था। इसे लेकर ही कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। चुनाव नियमों का उल्लंघन करने पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।
झूठे पार्षद के साथ करती रही कार्यक्रम
ललित किशोर तिवारी ने तरुण मित्र से बातचीत करते हुए बताया कि कोर्ट को आदेश दिए हुए लगभग पांच माह बीत चुके हैं। हाईकोर्ट ने बीजेपी पार्षद की चुनावी जीत को शून्य घोषित कर दिया था। इसके बाद उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मिलित करती थी। कोर्ट के आदेश के बावजूद खुद को पार्षद बताते हुए विकास कार्यों में खुद के नाम का शिलापट्ट लगवा रहा था।
डीएम और नगर आयुक्त दिलाएंगे शपथ
कोर्ट के आदेश के बाद मेयर की शक्तियां शून्य हो गई हैं। वहीं अब मेयर से संबंधित वित्तीय और प्रशासनिक फैसले डीएम और नगर आयुक्त ले सकेंगे। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि नगर आयुक्त अब सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिलाएंगे। जिसके बाद ही मेयर की शक्तियां वापस हो सकेंगी।












