जोधपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने अपने ही आश्रम की नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीडऩ मामले में आसाराम को राहत देने से इनकार करते हुए उसकी आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। बुधवार को जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने आसाराम समेत तीन आरोपितों की अपीलों पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि अदालत ने उन्हें गैंगरेप की धारा से बरी कर दिया, लेकिन अन्य गंभीर आरोपों में दोषसिद्धि कायम रखी गई है। साथ ही कोर्ट ने आसाराम को तत्काल सरेंडर करने के आदेश दिए हैं।
आसाराम उर्फ आसुमल की यौन शोषण मामले में प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर अपील पर बुधवार को फैसला आया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में आसाराम को पूरी तरह से आरोप मुक्त नहीं किया है।
उनकी सजा खत्म करने की अपील खारिज हुई है, लेकिन पॉक्सो एक्ट की गैर जमानती अपराध, आईपीसी की गैंग रेप और षड्यंत्र कर अपराध करने से जुड़ी धाराओं में दोषी नहीं माना है। खंडपीठ ने भारतीय दंड संहिता की दुष्कर्म, पॉक्सो की यौन शोषण और जेजे एक्ट सहित अन्य धाराओं को लेकर लोअर कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराया है, यानी सजा बरकरार रहेगी। खंडपीठ ने आसाराम के सेवादार शरतचंद्र और शिल्पी को पूरी तरह से आरोप मुक्त कर दिया है।












