HomeHealth & Fitnessसंस्कारों को सुरक्षित करने से संस्कृति अच्छी होती है--निर्भय सागर

संस्कारों को सुरक्षित करने से संस्कृति अच्छी होती है–निर्भय सागर

फिरोजाबाद ,जैन नगर खेड़ा स्थित जैन मंदिर में आयोजित धर्म सभा मे पूज्य आचार्य निर्भय सागर महाराज ने उपस्थित जन समूह को उपदेश देकर संस्कारो व संस्कृति के बारे में बताया
आचार्य श्री ने कहा संस्कारों से संस्कृति का निर्माण होता है,जहां जैसे संस्कार होते हैं। वैसी ही संस्कृति बनती है। जीवन में योग बनने का नाम ही संस्कार है, व्यक्तित्व के निर्माण का गुना के विकास का और अवगुणों के ह्रास होने का नाम ही संस्कार है। यह संस्कार दो प्रकार से होते है। सुसंस्कार और कुसंस्कार। सु संस्कार माता-पिता और गुरु से मिलते हैं। कुसंस्कार गलत संगति से मिलते हैं ।
माता-पिता मोह के संस्कार देते हैं, गुरु मोक्ष के संस्कार देते हैं। आचार्यश्री ने कहा जब व्यक्ति चावल लेकर मंदिर जाता है, तो मोक्ष मार्ग पर चलने के संस्कार मिलते हैं। और जब व्यक्ति चाबी लेकर दुकान पर जाता है, तो संसार मार्ग पर चलने के संस्कार मिलते हैं। संस्कारों को सुरक्षित करने से संस्कृति अच्छी होती है, मोक्ष मार्ग बनता है। और घर गृहस्थी भी सुखी होती है। जीवन में कई प्रकार के संस्कार होते हैं। 
पूर्व जीवन के संस्कार, गर्भ के संस्कार, जन्म के संस्कार, विवाह के संस्कार, दीक्षा के संस्कार, के संस्कार, दाह संस्कार। आचार्यश्री ने कहा दाह संस्कार होने से पूर्व यदि दीक्षा संस्कार कर लेंगे तो आत्मा से परमात्मा बनने के संस्कार प्रकट हो जाएगे।उन्हों ने जैन नगर खेड़ा के जिन मन्दिर से यह उपदेश श्रृद्धालुओं को दिया।
धर्म सभा में अध्यक्ष निमेष जैन शैली जैन, रजत जैन, पंकज जैन, अनुज जैन ,तुलसी विहार ,अरुण जैन पीली कोठी ,विनोद जैन मिलेनियम, अजय जैन एडवोकेट, ललित जैन, मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज उपस्थित रहे।

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