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भारी वर्षा एवं संभावित बाढ़ के दौरान सर्पदंश से बचाव एवं उपचार के प्रति सतर्क रहें:जिलाधिकारी

रामपुर:जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि आगामी दिनों में भारी वर्षा एवं संभावित बाढ़ की स्थिति के दौरान सर्पदंश (सांप के काटने) की घटनाओं में वृद्धि होने की संभावना रहती है।ऐसी परिस्थितियों में मानव एवं पशु हानि का जोखिम बढ़ जाता है।उन्होंने जनपदवासियों से अपील की है कि सभी नागरिक सतर्कता बरतें तथा सर्पदंश से बचाव एवं उपचार संबंधी आवश्यक सावधानियों का पालन करें।

जिलाधिकारी ने बताया कि सर्पदंश होने की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को शांत रखें तथा उसे अनावश्यक शारीरिक गतिविधि न करने दें।घबराहट कम करने का प्रयास करें,क्योंकि घबराने से शरीर में विष तेजी से फैल सकता है।सर्पदंश वाले स्थान को साबुन एवं स्वच्छ पानी से हल्के हाथों से साफ करें तथा प्रभावित अंग के आसपास पहनी गई घड़ी,अंगूठी,कड़ा,जूता आदि तुरंत उतार दें।पीड़ित व्यक्ति को बिना किसी विलंब के निकटतम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा सरकारी अस्पताल ले जाएं।आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन सेवा 108 अथवा अन्य उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से संपर्क करें।

उन्होंने कहा कि सर्पदंश होने पर सांप के विष को चूसकर निकालने का प्रयास न करें।घाव पर चीरा न लगाएं और न ही कोई मलहम,तेल,मिट्टी या अन्य पदार्थ लगाएं।बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा न दें तथा प्रभावित अंग को अत्यधिक कसकर न बांधें।किसी भी प्रकार के झाड़-फूंक,तंत्र-मंत्र,ओझा,बाबा या तांत्रिक के चक्कर में न पड़ें।साथ ही सांप को पकड़ने या मारने का प्रयास भी न करें।

जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्पदंश उपचार हेतु एंटी-स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।यह सुविधा जनपद के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सरकारी चिकित्सालयों में उपलब्ध है।उन्होंने कहा कि सर्पदंश की किसी भी घटना में समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।इसलिए पीड़ित व्यक्ति को तत्काल सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचाकर एंटी-स्नेक वेनम उपचार दिलाएं।

उन्होंने कहा,”सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक नहीं,बल्कि तत्काल चिकित्सकीय उपचार ही जीवन रक्षा का सबसे सुरक्षित एवं प्रभावी उपाय है।”

जिलाधिकारी ने जनपद के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वर्षा एवं बाढ़ के दौरान घरों,खेतों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें।रात्रि में टॉर्च का प्रयोग करें,बच्चों को जलभराव एवं झाड़ियों वाले क्षेत्रों में अकेले न जाने दें तथा पशुओं के बाड़ों एवं घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें,जिससे सर्पदंश की घटनाओं को रोका जा सके।

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