रामपुर । जिलाधिकारी/उपाध्यक्ष रामपुर विकास प्राधिकरण अजय कुमार द्विवेदी ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27 के अंतर्गत मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट एवं जौहर अली विश्वविद्यालय, रामपुर से संबंधित प्रकरण में विस्तृत सुनवाई, अभिलेखों के परीक्षण तथा विधिक प्रावधानों के गहन अध्ययन के उपरांत महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए 38 अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है।
प्राधिकरण द्वारा क्षेत्रीय अवर अभियंता की आख्या के आधार पर प्रकरण दर्ज कर 28 जून 2026 को नोटिस जारी किया गया था। इसके उपरांत 29 जून 2026 को सचिव, मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट तथा रजिस्ट्रार, जौहर अली विश्वविद्यालय को नोटिस प्रेषित कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया। प्रतिवादी द्वारा 08 जुलाई 2026 को संयुक्त रूप से अपना लिखित उत्तर प्रस्तुत किया गया।
लिखित उत्तर प्राप्त होने के पश्चात रामपुर विकास प्राधिकरण ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए प्रतिवादी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी प्रदान किया। इसके लिए 15 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की गई, जिसमें प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता एवं विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों, प्रतिवादी के लिखित उत्तर, जिला पंचायत रामपुर से प्राप्त अभिलेखों तथा उपलब्ध समस्त दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया गया। इस संबंध में अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत रामपुर द्वारा उपलब्ध कराई गई आख्या में स्पष्ट किया गया कि इस परिसर में स्थित कुल 40 भवनों में से केवल दो भवनों के मानचित्र तत्कालीन जिला पंचायत से विधिवत स्वीकृत कराए गए थे। इसके अतिरिक्त अन्य किसी भी भवन के लिए जिला पंचायत अथवा किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी से मानचित्र स्वीकृति अथवा निर्माण अनुमति प्राप्त होने का कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं पाया गया।
जिलाधिकारी/उपाध्यक्ष रामपुर विकास प्राधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-59 सहित अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के अनुसार यदि कोई क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल होता है, तो ऐसे निर्माण तभी वैध माने जा सकते हैं, जब उनके निर्माण के समय तत्कालीन सक्षम प्राधिकारी से विधिवत मानचित्र स्वीकृति अथवा निर्माण अनुमति प्राप्त की गई हो। प्रतिवादी द्वारा शेष भवनों के संबंध में ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
प्राधिकरण ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि प्रतिवादी द्वारा यह तर्क दिया गया कि संबंधित भूमि पूर्व में रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं थी तथा निर्माण पूर्व में किए गए थे। इस तर्क का परीक्षण करते हुए प्राधिकरण ने कहा कि उस अवधि में भी जिला पंचायत अधिनियम एवं लागू नियमों के अंतर्गत निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से मानचित्र स्वीकृति आवश्यक थी। इसका प्रमाण स्वयं इस तथ्य से मिलता है कि परिसर के दो भवनों के मानचित्र तत्कालीन जिला पंचायत से स्वीकृत कराए गए थे, जबकि शेष भवनों के लिए कोई स्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गई।
उन्होंने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवैध निर्माणों के विरुद्ध पारित निर्देशों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई अपेक्षित है। उपलब्ध अभिलेखों, विधिक परीक्षण तथा जिला पंचायत से प्राप्त प्रमाणों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि मेडिकल कॉलेज भवन एवं एकेडमी ब्लॉक को छोड़कर शेष 38 निर्माण, जिनका कुल क्षेत्रफल 82,309.80 वर्गमीटर है, बिना सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति अथवा अनुमति के निर्मित किए गए हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्माण जिस भूमि पर स्थित हैं तथा जिस प्रयोजन के लिए उनका उपयोग किया जा रहा है, वह वर्तमान भूमि उपयोग के अनुरूप अनुमन्य नहीं है। इसलिए इन निर्माणों का विनियमीकरण (रेगुलराइजेशन) संभव नहीं है और विधिक प्रावधानों के अनुसार ध्वस्तीकरण ही एकमात्र वैधानिक विकल्प है।
जिलाधिकारी/उपाध्यक्ष आरडीए ने यह भी निर्देश दिए हैं कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी एवं जिला विद्यालय निरीक्षक इस परिसर में काउंसिलिंग कैम्प स्थापित कर छात्रों को आवश्यक मार्गदर्शन एवं समुचित सहायता उपलब्ध कराएंगे ताकि उनके शैक्षणिक हित सुरक्षित रह सकें।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि जनपद में बिना स्वीकृत मानचित्र अथवा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के किए गए किसी भी अवैध निर्माण के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार कानूनसम्मत एवं प्रभावी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।












