सिद्धार्थनगर में मानसून की बेरुखी से किसान और आम लोग परेशान हैं। जून का अंतिम सप्ताह भी पर्याप्त बारिश के बिना बीत गया, जिससे खेती-किसानी पर संकट गहरा गया है। जिले में तापमान लगातार 38 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिसने जनजीवन को प्रभावित किया है। धान की रोपाई का समय नजदीक आने के साथ ही किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई किसानों ने पंपिंग सेटों का उपयोग कर भारी खर्च पर धान की नर्सरी तैयार की है। हालांकि, बारिश की कमी के कारण इन नर्सरियों में पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है।
परिणामस्वरूप, कई स्थानों पर धान की पौध पीली पड़ने लगी है, जिससे किसानों को फसल उत्पादन में कमी की आशंका सता रही है। डीजल और बिजली की बढ़ती कीमतों के बीच लगातार सिंचाई करना किसानों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने बताया कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। खेतों में पानी की कमी के कारण रोपाई की तैयारियां भी अधूरी पड़ी हैं।
किसानों को आशंका है कि मानसून में और देरी होने से खेती की लागत में वृद्धि होगी और पैदावार पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। दूसरी ओर, भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है, और लोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बाजारों में भीड़ कम हो गई है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लोग गर्मी से बचाव के लिए घरों में रहने को मजबूर हैं। गर्मी का असर बिजली व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। बढ़ती बिजली खपत के चलते कई इलाकों में रात्रिकालीन बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। रात में बिजली जाने से लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। उमस और गर्मी के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
चिकित्सकों के अनुसार लगातार बढ़ते तापमान से लू, डिहाइड्रेशन और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्मी से संबंधित समस्याओं वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में निकलने से बचने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है।
मौसम की बेरुखी और तपती गर्मी के बीच जिले के लोगों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं। किसान अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि आमजन भी गर्मी से राहत दिलाने वाली बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो खेती-किसानी के साथ-साथ जनजीवन पर इसका असर और गंभीर हो सकता है।












