लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मांग की है कि उत्तर प्रदेश के आगरा तथा ग्रेटर नोएडा में विद्युत वितरण कार्य कर रही निजी कंपनियों का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक,सीएजी द्वारा व्यापक ऑडिट कराया जाए,ताकि उनके आय-व्यय,लाभ-हानि, सरकारी रियायतों तथा उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। संघर्ष समिति का कहना है कि सार्वजनिक हित से जुड़े विद्युत क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सीएजी ऑडिट अत्यंत आवश्यक है।
संघर्ष समिति ने कहा कि हाल ही में दिल्ली न्यायालय ने दिल्ली में कार्यरत निजी बिजली वितरण कंपनियों (बीएसईएस डिस्कॉम) के सीएजी ऑडिट का मार्ग प्रशस्त करते हुए स्पष्ट किया है कि निजी कंपनियों द्वारा सीएजी ऑडिट का विरोध उचित नहीं है। न्यायालय ने माना कि बिजली वितरण जैसी सार्वजनिक सेवा का सीधा प्रभाव करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ता है, इसलिए उसकी वित्तीय जांच सार्वजनिक हित में आवश्यक है। उत्तर प्रदेश में भी इसी सिद्धांत को लागू किया जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने मांग की कि आगरा अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी समझौते की तत्काल पुनर्समीक्षा कराई जाए तथा यदि जांच में अनियमितताएं और सार्वजनिक हित के विरुद्ध शर्तें पाई जाती हैं तो इस घाटे वाले करार को निरस्त किया जाए। सीएजी ऑडिट से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच संभव होगी और वास्तविक वित्तीय स्थिति उजागर होगी।
निजी बिजली कंपनियों की वित्तीय जांच आवश्यक : संघर्ष समिति
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