सिद्धार्थनगर जिले के मोहाना क्षेत्र में धनगढ़वा-भगवानिया नहर पर एक पुराने कर्मा के पेड़ को अवैध रूप से काटकर गायब करने का मामला सामने आया है। यह घटना लालपुर चौकी अंतर्गत हुई। प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि पेड़ सिंचाई विभाग की सरकारी जमीन पर था, जिसके बाद ग्रामीणों में कार्रवाई में देरी को लेकर आक्रोश है। इस मामले में वन विभाग और सिंचाई विभाग के बीच जमीन के मालिकाना हक को लेकर विरोधाभास भी सामने आया था। ककरहवा क्षेत्र के फॉरेस्टर शैलेंद्र कुमार यादव ने शुरुआत में इस जमीन को निजी बताकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया था। हालांकि, दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद सिंचाई विभाग हरकत में आया। सिंचाई विभाग की एसडीओ मालविका जैसल ने मामले की जांच शुरू कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।मौके की तस्वीरों से स्पष्ट होता है कि पेड़ नहर के बंधे पर गिरा पड़ा था। इसके बावजूद फॉरेस्टर शैलेंद्र कुमार यादव ने दावा किया था कि पेड़ किसान की निजी जमीन पर था। स्थानीय लोग फॉरेस्टर के इस बयान पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि तस्वीरें उनके दावे के विपरीत हैं। जांच के बाद अब यह आधिकारिक रूप से पुष्टि हो चुकी है कि काटा गया पेड़ सिंचाई विभाग की सरकारी जमीन पर ही था। यह घटना 17 जून को हुई थी और 19 जून को दैनिक भास्कर में इस संबंध में खबर प्रकाशित की गई थी। आज 22 जून होने के बावजूद जांच-पड़ताल और कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर स्थानीय निवासियों में रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि नहर की सफाई के नाम पर पहले भी कई पेड़ अवैध रूप से काटे जा चुके हैं। स्थानीय लोग अब प्रशासन से इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, विशेषकर फॉरेस्टर शैलेंद्र कुमार यादव के विरोधाभासी बयानों की भी गहनता से जांच होनी चाहिए।
सिद्धार्थनगर में नहर किनारे सरकारी पेड़ काटा गया:सिंचाई विभाग की जमीन पर पुष्टि, कार्रवाई में देरी पर सवाल
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