श्रावस्ती में 9 मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस पूरी अकीदत के साथ बृहस्पतिवार रात्रि निकाला गया। कर्बला के शहीदों की याद में चारों ओर ‘या हुसैन’ की सदाएं गूंजती रहीं। हुसैनिया इमामबाड़े से अंजुमन हुसैनिया द्वारा निकाले गए इस जुलूस में इमाम हुसैन की सवारी ‘दुलदुल’ के दीदार के लिए हजारों अकीदतमंद उमड़ पड़े। जुलूस से पहले एक मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें मौलाना रईस अब्बास ने कर्बला के वाकये पर प्रकाश डाला। उन्होंने इमाम हुसैन और उनके परिवार पर हुए जुल्मों का जिक्र किया। मौलाना ने बताया कि इमाम हुसैन हक और सच्चाई के लिए अंतिम दम तक डटे रहे और जालिम यजीद के सामने झुकने से इनकार कर दिया। मजलिस के बाद इमाम हुसैन की सवारी ‘दुलदुल’ के साथ मुख्य जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ वापस हुसैनिया इमामबाड़े पहुंचा। इस दौरान अंजुमन हुसैन नासिरगंज के अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी और सीनाज़नी कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। जुलूस के समापन पर इमामबाड़े में ‘आग का मातम’ किया जायेगा। दहकते अंगारों पर ‘या हुसैन’ की गूंज के साथ मातम कर अकीदतमंद हक और इंसाफ के रास्ते पर चलने का संदेश देंगे। पूरा जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
श्रावस्ती में 9 मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस:रात्रि होते ही हजारों अकीदतमंदों ने किया दुलदुल का दीदार, ‘या हुसैन’ से गूंजा शहर
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