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बस्ती में विकास कार्यों के नाम पर 21.37 लाख रुपये के गबन के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्सना ने निवर्तमान ग्राम प्रधान दिलीप कुमार और तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव पिंकी से गबन की गई धनराशि की बराबर-बराबर वसूली के आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, दोनों से 10,68,809-10,68,809 रुपये की वसूली की जाएगी। मामला जिले के साऊंघाट विकास खंड की केशवारा ग्राम पंचायत का है। मामले की जांच गांव निवासी अतुल चौधरी की शिकायत पर कराई गई थी। प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद 11 सितंबर 2025 को तत्कालीन ग्राम प्रधान दिलीप कुमार के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए थे। साथ ही ग्राम पंचायत के कार्यों के संचालन के लिए ग्राम पंचायत सदस्यों की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। अंतिम जांच में गबन की पुष्टि प्रकरण की अंतिम जांच परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) से कराई गई। 15 मई 2026 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के गबन की पुष्टि हुई। जांच के दौरान ग्राम प्रधान को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया, लेकिन उन्होंने न तो कोई जवाब दिया और न ही कोई दस्तावेज उपलब्ध कराया। भू-राजस्व और वेतन से होगी वसूली जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने 21,37,618 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया। इसके तहत पूर्व ग्राम प्रधान दिलीप कुमार से 10,68,809 रुपये भू-राजस्व की भांति वसूले जाएंगे, जबकि तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव पिंकी से 10,68,809 रुपये उनके वेतन से वसूल किए जाएंगे। जिला विकास अधिकारी को दिए गए निर्देश जिलाधिकारी ने जिला विकास अधिकारी को वसूली की कार्रवाई समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त कदम माना जा रहा है।
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केशवारा ग्राम पंचायत में 21.37 लाख का गबन:बस्ती में पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव से होगी बराबर-बराबर वसूली
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