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चचेरे भाई के मुंडन में पंखा गिरा, मासूम की मौत:सिद्धार्थनगर में मां के साथ सोते समय 6 माह के बच्चे पर कुंडे समेत टूटकर गिरा


सिद्धार्थनगर के उसका थाना क्षेत्र के कर्मा गांव में मुंडन संस्कार की तैयारियों के बीच इसी बीच देर रात कमरे की छत से पंखा कुंडे सहित टूटकर नीचे गिर गया। पंखे की चपेट में आने से ढाई माह का मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद उत्सव का माहौल पलभर में मातम में बदल गया। हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। शनिवार को होने वाले मुंडन संस्कार से पहले शुक्रवार रात घर में अखंड रामचरितमानस पाठ चल रहा था और रिश्तेदारों का आना-जाना लगा था। मुंडन संस्कार की तैयारियां थीं पूरी, घर में जुटे थे रिश्तेदार कर्मा गांव निवासी रमेश पांडेय के परिवार में शनिवार को उनके पौत्र अर्श, जो अभिषेक पांडेय का पुत्र है, का मुंडन संस्कार होना था। इस अवसर पर शुक्रवार रात से घर में अखंड रामचरितमानस पाठ का आयोजन किया गया था। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और शुभचिंतक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए घर पहुंच चुके थे। पूरे घर में खुशी और उत्साह का माहौल था। कुंडे समेत टूटा पंखा मासूम पर गिरा शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे परिवार के अधिकांश सदस्य विश्राम कर रहे थे। रमेश पांडेय का दूसरा पौत्र गोलू, जो आजाद पांडेय का ढाई माह का बेटा था, अपनी मां के साथ कमरे में सो रहा था। तभी अचानक छत में लगा पंखा कुंडे सहित टूटकर नीचे आ गिरा। पंखा सीधे मासूम गोलू के ऊपर गिरा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। तेज आवाज सुनकर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और बच्चे को तत्काल अस्पताल लेकर दौड़े। अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित परिजन घायल मासूम को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। यह खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। जिस घर में कुछ घंटों बाद मुंडन संस्कार की रस्में निभाई जानी थीं, वहां चीख-पुकार और मातम का माहौल छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मुंडन कार्यक्रम स्थगित, गांव में शोक की लहर परिवार ने बताया कि मुंडन संस्कार की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन हादसे के बाद कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। गांव में जैसे ही घटना की जानकारी फैली, लोगों का परिवार के घर पहुंचना शुरू हो गया। ग्रामीणों ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। एक पल में खुशियों का माहौल गहरे दुख में बदल जाने से पूरे गांव में शोक की लहर है।

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