बलिया। उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के रसड़ा से लगातार तीन बार विधायक रहे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय उमाशंकर सिंह को शुक्रवार को उनके पैतृक जनपद बलिया में पूरे राजसी सम्मान और जनसैलाब की मौजूदगी में अंतिम विदाई दी गई। उनकी अंतिम यात्रा में ऐसा जनसमूह उमड़ा कि जाति, धर्म, उम्र, अमीरी-गरीबी और क्षेत्र की सभी सीमाएं मानो समाप्त हो गईं। हर वर्ग के लोग अपने प्रिय जननेता के अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि के लिए उमड़ पड़े।
बुधवार को दिल्ली में कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद उमाशंकर सिंह का निधन हो गया था। उनके निधन की खबर से पूरे पूर्वांचल, विशेषकर बलिया में शोक की लहर दौड़ गई थी। शुक्रवार सुबह दस बजे उनके पैतृक गांव से निकली अंतिम यात्रा के दौरान बलिया मुख्यालय तक जगह-जगह हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर अपने लोकप्रिय नेता को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
अंतिम यात्रा में श्रद्धांजलि देने आए लोगों का कहना था कि उमाशंकर सिंह को केवल एक राजनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि दानवीर, जनसेवक और जरूरतमंदों के सहारा के रूप में भी याद किया जाता है। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सार्वजनिक जीवन जनसेवा के अनेक उदाहरणों से भरा रहा। यही कारण रहा कि उनकी अंतिम यात्रा जनसैलाब में बदल गई।
सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के इस अनन्य भक्त का संसार से विदा होना लोगों के बीच विशेष भावनात्मक चर्चा का विषय रहा। श्रद्धालुओं और समर्थकों का कहना था कि भोलेनाथ का यह सेवक अंततः उन्हीं के चरणों में समाहित हो गया।
अंतिम यात्रा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, व्यापारी, किसान, युवा, महिलाएं और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। बलिया ने अपने इस लोकप्रिय जननेता को पूरे सम्मान, गरिमा और भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ अंतिम विदाई दी।












