लखनऊ। एलडीए एक बार फिर अपने विवादित कार्यों को लेकर चर्चा में है। आरोप है कि एलडीए के अधिकारियों ने रियल एस्टेट कारोबारी से सांठ-गांठ किया और पूरे प्रोजेक्ट को आधा-अधूरा छोड़ दिया। बावजूद इसके एलडीए ने बिल्डर को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इस मामले में पीड़ित लोगों ने कई बार शिकायत की लेकिन एलडीए के अधिकारियों ने बस पत्राचार तक ही अपनी कार्रवाई सीमित रखी। बिल्डर ने जिन्हे फ़्लैट बेंचे वह अब अपनी गाढ़ी कमाई का हिसाब मांगने के लिए एलडीए के दफ्तर का चक्कर काट रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक़ पूरा मामला सरसवां गांव में बनाई गई ओमेक्स सिटी के “सृष्टि एवं संस्कृति अपार्टमेंट” का है। इंटीग्रेटेड टाउनशिप योजना के तहत ईडब्ल्यूएस और एलआईजी फ्लैट बनाए गए थे। करीब 5.268 हेक्टेयर भूमि पर विकसित इस परियोजना में 500 से अधिक फ्लैट बनाए गए। वर्ष 2021 में एलडीए ने परियोजना को कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया, लेकिन अब खुद एलडीए के पत्रों से साफ हो रहा है कि कई काम अधूरे थे। बीते 11 मई 2026 को मुख्य नगर नियोजक द्वारा ओमेक्स लिमिटेड को भेजे गए पत्र में साफ लिखा गया कि “स्नैग लिस्ट के अनुसार अवशेष कार्य” अभी तक पूरे नहीं हुए हैं और एसटीपी की गुणवत्ता में भी सुधार कराया जाना है। यही नहीं, उपाध्यक्ष स्तर से बिल्डर को आरडब्ल्यूए के साथ समन्वय कर लंबित कार्य पूरे कराने के निर्देश भी दिए गए।
सोसायटी के निवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार शिकायतें कीं। शासन स्तर तक मामला पहुंचा, जांच हुई, आदेश जारी हुए, रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन कार्रवाई धरातल पर नहीं उतरी। स्थानीय निवासियों ने एलडीए को भेजे जवाब में साफ कहा कि यदि सोसायटी पूर्ण नहीं है तो कम्प्लीशन सर्टिफिकेट निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्नैग लिस्ट सार्वजनिक करने और अधूरे कार्यों की स्पष्ट जानकारी देने की मांग भी उठाई।
निवासियों का आरोप है कि आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी मामले को “खरीदार और विक्रेता के बीच का विवाद” बताकर जिम्मेदारी से हाथ खींच लिया। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाउंड्री वॉल, सीवरेज, एसटीपी संचालन और अन्य बुनियादी सुविधाओं में खामियां आज भी मौजूद हैं।
इसके बावजूद फाइलों में परियोजना “पूर्ण” दिखाई जा रही है। आरोप यह भी हैं कि पूरे मामले में बिल्डर और प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों के बीच मिलीभगत रही, जिसके चलते नियमों को नजरअंदाज कर प्रमाणपत्र जारी किया गया। वहीं इस मामले में वीसी प्रथमेश कुमार से बात करने की कोशिश की गई,किन्तु खबर लिखने तक उनका कोई जवाब नहीं मिल सका ।












