शांति के तमाम दावों और बार-बार हो रही शांति वार्ताओं से इतर इजरायल और हिजबुल्लाह की लड़ाई जा रही है। इसका खामियाजा सैनिकों और लड़ाकों के साथ-साथ आम जनता भी भुगत रही है। इसका एक उदाहरण दक्षिणी लेबनान से सामने आया है जहां बुधवार को हुए इजरायल के एक हमले एक लेबनानी पत्रकार की मौत हो गई। इजरायल की ओर से हो रहे हवाई हमलों से बचने के लिए एक घर में छिपीं पत्रकार अमल खलील उसी घर के मलबे में दब गई थी क्योंकि वह घर भी हमले का शिकार हुआ था। दोनों तरफ से चल रही गोलीबारी के कारण उन्हें 6 घंटे तक नहीं निकाला जा सका और उनकी मौत हो गई।
लेबनानी समाचार पत्र ‘अल-अखबार’ के अनुसार, उसकी पत्रकार अमल खलील बुधवार को दक्षिणी लेबनान के अल-तिरी गांव में गई थीं। वह मार्च की शुरुआत से ही इजरायल और लेबनानी चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला के बीच फिर से भड़के संघर्ष को कवर कर रही थीं। बताया गया कि वह एक सहयोगी के साथ कार से यात्रा कर रही थीं, तभी पास में इजरायल की ओर से हमला हुआ। इसके बाद दोनों ने जान बचाने के लिए पास के एक मकान में शरण ली। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पहले हमले में दो लोगों की मौत हो गई।
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रेस्क्यू के दौरान भी हुई गोलीबारी
कुछ देर बाद इजरायल ने उसी मकान को निशाना बनाया, जहां अमल खलील और उनकी सहयोगी जैनब फराज ने शरण ली हुई थी। लेबनाना के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बचाव दल मौके पर पहुंचा और गंभीर रूप से घायल फराज को बाहर निकाल लिया गया। पहले हमले में मारे गए दो लोगों के शव भी बरामद किए गए।
हालांकि, जब बचावकर्मी अमल खलील तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, तब इजरायली सेना की गोलीबारी के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा। अमल खलील कई घंटों तक मलबे में दबी रहीं। लेबनानी सेना, सिविल डिफेंस और लेबनानी रेड क्रॉस के बचावकर्मी काफी देर बाद मौके पर पहुंच सके। हमले के कम से कम छह घंटे बाद, देर रात उनका शव निकाला गया।
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लेबनान के सूचना मंत्री पॉल मोर्कोस ने कहा है, ‘पत्रकारों की हत्या एक अपराध है और अंतरराष्ट्रीय तथा मानवीय कानून का खुला उल्लंघन है।’ बता दें कि दक्षिणी लेबनान की रहने वाली अमल खलील साल 2006 से ‘अल-अखबार’ के लिए उस क्षेत्र से रिपोर्टिंग कर रही थीं। उनकी मौत के साथ इस वर्ष लेबनान में मारे गए पत्रकारों की संख्या 9 हो गई है।












