Homeउत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)बहराइच में मानसून की देरी, पारा 40 पार:उमस और लू से जनजीवन...

बहराइच में मानसून की देरी, पारा 40 पार:उमस और लू से जनजीवन प्रभावित, धान की फसल पर संकट


बहराइच में मानसून की देरी के कारण भीषण गर्मी और उमस से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पिछले कई दिनों से जिले का तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। तेज धूप और उमस के कारण लोग पसीने से तर-बतर हैं। दोपहर में सड़कें वीरान दिख रही हैं, और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। लू के थपेड़ों ने बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है, जिससे अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और बुखार के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। बहराइच एक कृषि प्रधान जिला है, जिसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर करती है। मानसून की बेरुखी से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि धान की रोपाई पर संकट मंडरा रहा है। धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है और किसान खेतों की जुताई कर रोपाई की तैयारी में हैं, लेकिन बारिश न होने से नदियां और नहरें भी अपना जलस्तर खो रही हैं। समय पर बारिश न होने के कारण धान की नर्सरी (बेहन) पीली पड़कर सूखने लगी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान का डर सता रहा है। जिन किसानों के पास निजी पंपिंग सेट हैं, वे महंगे डीजल का उपयोग कर अपनी फसलों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, डीजल की बढ़ती कीमतें और बिजली की अघोषित कटौती छोटे किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मानसून जुलाई के पहले सप्ताह तक नहीं पहुंचता है, तो धान की रोपाई का चक्र बिगड़ जाएगा। इसका सीधा असर पैदावार की गुणवत्ता और मात्रा पर पड़ेगा, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और बहराइच में मानसून की दस्तक के लिए अभी कुछ दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है। विभाग ने अगले 48 से 72 घंटों में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी और बादलों की आवाजाही की संभावना जताई है। हालांकि, जब तक झमाझम बारिश नहीं होती, तब तक गर्मी से बड़ी राहत और किसानों की फसलों को जीवनदान मिलने की उम्मीद कम है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments