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तीन महीने के भीतर माता-पिता दोनों को खो चुके धर्मूपुर गांव के बच्चों की दर्दभरी कहानी सामने आने के बाद मदद के हाथ आगे बढ़े हैं। दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री डॉ. ममता पांडे शुक्रवार को बच्चों के घर पहुंचीं। उन्होंने परिवार का हालचाल जाना, बच्चों को ढांढस बंधाया और आर्थिक सहयोग प्रदान किया। साथ ही भविष्य में भी हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। पहले पिता, फिर मां ने छोड़ा साथ दुबौलिया ब्लॉक के धर्मूपुर गांव निवासी दो भाई अमित गौतम और अंकित गौतम तथा उनकी अविवाहित बहन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार ने महज तीन महीने के भीतर अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। पहले पिता का निधन हुआ और इसके बाद 12 अगस्त को मां ने कैंसर से जूझते हुए दम तोड़ दिया। माता-पिता के निधन के बाद बच्चों के सामने जीवन चलाने के साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई। 12 साल के अमित के कंधों पर परिवार माता-पिता की मौत के बाद महज 12 वर्षीय अमित गौतम के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। जिस उम्र में बच्चे पढ़ाई और खेल-कूद में अपना समय बिताते हैं, उस उम्र में अमित को परिवार की चिंता सताने लगी। बच्चों की स्थिति सामने आने के बाद ग्रामीणों में भी उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई। परिवार के सामने आर्थिक संकट के साथ भावनात्मक सहारे की भी बड़ी जरूरत थी। भास्कर की खबर के बाद मदद को आगे आए लोग दैनिक भास्कर ने इन बच्चों की मार्मिक कहानी को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर सामने आने के बाद क्षेत्र में लोगों की संवेदनाएं इन बच्चों के साथ जुड़ीं। इसी क्रम में डॉ. ममता पांडे ने मामले का संज्ञान लिया और शुक्रवार को खुद बच्चों के घर पहुंचीं। उन्होंने परिवार की स्थिति देखी और बच्चों से बातचीत कर उनके दुख को साझा किया। इस दौरान उन्होंने आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। बोलीं- बच्चे अकेले नहीं, समाज उनके साथ डॉ. ममता पांडे ने बच्चों को ढांढस बंधाते हुए उनके सिर पर हाथ रखा। उन्होंने कहा, “ये बच्चे अकेले नहीं हैं, समाज उनके साथ खड़ा है।” उन्होंने कहा कि ऐसे असहाय बच्चों की मदद करना समाज के हर संवेदनशील व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों को भरोसा दिलाया कि जरूरत के समय उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। समय-समय पर परिवार का लेंगी हालचाल डॉ. ममता पांडे ने कहा कि वह स्वयं भी समय-समय पर परिवार का हालचाल लेती रहेंगी। उन्होंने बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उनकी इस पहल से ग्रामीणों में संतोष देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने कहा कि मुश्किल समय में बच्चों के साथ खड़ा होना मानवीय संवेदना का उदाहरण है। ग्रामीणों ने डॉ. ममता पांडे की पहल की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि आगे भी समाज के अन्य लोग इन बच्चों की मदद के लिए आगे आएंगे।
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3 महीने में माता-पिता दोनों को खोया:12 साल के बेटे पर आई परिवार की जिम्मेदारी; भास्कर की खबर के बाद मिली मदद
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