श्रावस्ती जिले के चंदन कोटिया गांव में गुरुवार रात एक मजलिस का आयोजन किया गया। शिया समुदाय द्वारा आयोजित यह मजलिस रात 10 बजे शुरू हुई, जो मरहूम फ़िदा अली साहब की बरसी के अवसर पर रखी गई थी। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय मोमनीन और अकीदतमंदों (श्रद्धालुओं) ने शिरकत की। यह पूरा कार्यक्रम जनाब चुन्नन अली के अज़ाखाने में संपन्न हुआ। मरहूम को याद करने और शहीदों को खिराजे-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश करने के लिए गांव और आस-पास के इलाकों से भारी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे। कर्बला के शहीदों के धैर्य और शहादत पर डाला प्रकाश मजलिस को खिताब करते हुए जाकिर जनाब अम्मार रिजवी ने कर्बला के ऐतिहासिक वाकये का जिक्र किया। उन्होंने इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत, उनके ऊंचे हौसले और बेमिसाल धैर्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। जाकिर के बयान को सुनकर माहौल गमगीन हो गया और अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। मगफिरत की दुआ के बाद बंटा तबर्रुक मजलिस के आखिरी हिस्से में मरहूम फ़िदा अली के ईसाले-सवाब (आत्मा की शांति) के लिए विशेष दुआ मांगी गई। उपस्थित सभी लोगों ने उनके गुनाहों की मगफिरत (क्षमा) और दरजात की बुलंदी की कामना की। कार्यक्रम के समापन पर मेजबान जनाब चुन्नन अली ने मजलिस में आए सभी मोमनीन को तबर्रुक (प्रसाद) वितरित किया।
चंदन कोटिया गांव में मजलिस का आयोजन:मरहूम फ़िदा अली की बरसी पर जुटे अकीदतमंद, जाकिर अम्मार रिजवी ने बयान की कर्बला के शहीदों की दास्तान
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