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सिर मुंडवाने से रूसी खत्म हो जाती है या नहीं? सच्चाई जान लीजिए

अक्सर जब लोग डैंड्रफ यानी रूसी की समस्या से बहुत परेशान हो जाते हैं, तो उन्हें लगता है कि सिर मुंडवाना या ‘गंजा’ होना ही इसका आखिरी इलाज है। लोगों के मन में यह धारणा बैठी हुई है कि अगर सिर पर बाल ही नहीं रहेंगे, तो रूसी कहां टिकेगी लेकिन हाल ही में ‘इंडियन एक्प्रेस’ की एक रिपोर्ट में डॉ.श्वेता नखावा (KIMS अस्पताल, ठाणे की डर्मेटोलॉजिस्ट) ने इस बात को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिर मुंडवाने से रूसी का इलाज नहीं होता, बल्कि यह सिर्फ एक अस्थायी भ्रम है।

डॉ.श्वेता नखावा के अनुसार, डैंड्रफ का असली कारण हमारे बाल नहीं बल्कि सिर की त्वचा यानी ‘स्कैल्प’ होती है। जब कोई व्यक्ति अपना सिर मुंडवाता है, तो रूसी के सफेद टुकड़े सिर्फ इसलिए कम दिखाई देते हैं क्योंकि अब उन्हें धोना या साफ करना आसान हो गया है।

डैंड्रफ तब होता है जब हमारी स्कैल्प पर मौजूद तेल और एक विशेष प्रकार की फंगस आपस में मिल जाते हैं। सिर मुंडवाने से न तो तेल बनाने वाली जड़ कम होती हैं और न ही उस फंगस का बढ़ना रुकता है, इसीलिए जैसे ही बाल वापस आते हैं डैंड्रफ फिर से दिखने लगता है।

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क्या सिर मुंडवाना स्कैल्प के लिए खतरनाक हो सकता है?

डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि सिर मुंडवाने से स्थिति और भी खराब हो सकती है। जब किसी रेजर का इस्तेमाल करते हैं, तो सिर की त्वचा पर छोटे-छोटे कट लग सकते हैं। इससे स्कैल्प की वह प्राकृतिक परत कमजोर हो जाती है जो उसे बाहरी संक्रमण से बचाती है। बाल न होने की वजह से सिर पर सीधे तौर पर तेज धूप, धूल और प्रदूषण के संपर्क में आ जाती है। इसकी वजह से सिर में रूखापन, खुजली और लाल होने जैसी समस्याएं बढ़ सकती है, जो डैंड्रफ के लिए जिम्मेदार कीटाणुओं को पनपने का और ज्यादा मौका देती हैं।

रूसी से छुटकारा पाने का सही और वैज्ञानिक तरीका

डॉ. नखावा ने सलाह दी है कि इस समस्या से लड़ने के लिए किसी भी बड़े कदम (जैसे मुंडन) की बजाय लगातार देखभाल करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने बताया कि ‘मेडिकेटेड एंटी-डैंड्रफ शैम्पू’ का नियमित इस्तेमाल ही इसका सबसे कारगर इलाज है। इन शैम्पू को इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें लगाकर तुरंत न धोएं, बल्कि कुछ मिनटों के लिए सिर पर छोड़ दें ताकि वे फंगस को खत्म कर सकें।

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इसके अलावा, डॉक्टर ने बहुत ज्यादा तेज साबुन के इस्तेमाल से बचने, सिर को सीधी धूप से बचाने और मानसिक तनाव को कम रखने की सलाह दी है। अंत में उन्होंने यही जोर दिया कि डैंड्रफ एक त्वचा की स्थिति है, इसलिए इलाज त्वचा का होना चाहिए, बालों का नहीं।

नवरात्रि में किया गया ये छोटा सा उपाय साढ़े साती के बड़े से बड़े संकट को कर देगा खत्म!

हर साल नवरात्रि आते ही घर-घर में पूजा, व्रत और भक्ति का माहौल बन जाता है, लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ मां दुर्गा की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि शनि की साढ़े साती से राहत पाने के उपाय भी तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं. जिन लोगों के जीवन में लगातार रुकावटें, आर्थिक तनाव या मानसिक दबाव बना हुआ है, वे इसे अक्सर शनि के प्रभाव से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में नवरात्रि जैसे पावन दिनों में किए गए उपाय शनि की साढ़े साती के असर को कम कर सकते हैं? ज्योतिष के जानकारों की मानें तो नवरात्रि का समय आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है, और इसी वजह से इस दौरान किए गए उपाय ज्यादा असरदार माने जाते हैं. यही कारण है कि इन दिनों मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-पाठ का सिलसिला बढ़ जाता है.

नवरात्रि और साढ़े साती का कनेक्शन क्या है?
ज्योतिष मान्यता के अनुसार, शनि की साढ़े साती करीब साढ़े सात साल तक चलने वाली एक ऐसी अवधि होती है, जब व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अधिक तीव्र रूप में मिलता है. यह तीन चरणों में बंटी होती है और हर चरण का असर अलग-अलग तरह से महसूस होता है. कई लोग बताते हैं कि इस दौरान करियर में रुकावट, रिश्तों में तनाव या स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाती हैं. हालांकि, इसे पूरी तरह नकारात्मक मान लेना भी सही नहीं है. कई मामलों में यही समय लोगों को मजबूत और अनुशासित भी बनाता है. नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ अगर शनि से जुड़े उपाय किए जाएं, तो इसे संतुलन बनाने वाला समय माना जाता है.

क्यों खास मानी जाती है नवरात्रि?
आध्यात्मिक ऊर्जा का समय
नवरात्रि के नौ दिन को ऊर्जा का सबसे शुद्ध और सक्रिय समय माना जाता है. इन दिनों में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और साधना का असर सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा माना जाता है.

दुर्गा सप्तशती का महत्व
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ एक आम परंपरा है. मान्यता है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और मानसिक स्थिरता मिलती है. कुछ ज्योतिषाचार्य यह भी बताते हैं कि साढ़े साती के हर साल के लिए 100 श्लोकों का पाठ प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा जाता है, जिससे व्यक्ति को राहत मिल सकती है.

नवरात्रि में किए जाने वाले खास उपाय
1. शनि मंत्र का जाप
नवरात्रि के दौरान रोजाना “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना काफी फायदेमंद माना जाता है. कई लोग सुबह या शाम मंदिर जाकर यह जाप करते हैं, जिससे मन को शांति भी मिलती है.
2. तेल का दीपक और दान
शनिवार या नवरात्रि के खास दिनों में शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना आम बात है. इसके साथ ही काले तिल, लोहे की वस्तु या काले कपड़े का दान करने की भी सलाह दी जाती है.

3. हनुमान पूजा का असर
दिलचस्प बात यह है कि शनि के प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी की पूजा भी काफी लोकप्रिय है. नवरात्रि में हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ जाती है. एक स्थानीय श्रद्धालु बताते हैं कि उन्होंने लगातार नौ दिन तक हनुमान चालीसा पढ़ी और उन्हें मानसिक राहत महसूस हुई. हालांकि, इसे आस्था से जोड़कर ही देखा जाता है.
4. शमी पौधे का महत्व
कई लोग नवरात्रि के दौरान शमी के पौधे में काले तिल अर्पित करते हैं. मान्यता है कि इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं.

क्या कहते हैं जानकार?
ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी उपाय तभी असर करता है जब उसे सही समय और सही तरीके से किया जाए. नवरात्रि जैसे विशेष अवसर पर किए गए उपाय इसलिए ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं क्योंकि उस समय व्यक्ति की आस्था और ध्यान दोनों मजबूत होते हैं. हालांकि, वे यह भी साफ करते हैं कि साढ़े साती को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन इसके प्रभाव को जरूर कम किया जा सकता है.

आस्था और अनुभव का मेल
आज के समय में जहां लोग एक ओर विज्ञान और लॉजिक पर भरोसा करते हैं, वहीं दूसरी ओर कठिन समय में आस्था का सहारा लेना भी आम बात है. नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले ये उपाय सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लोगों के लिए एक मानसिक सहारा भी बन जाते हैं. कई बार यही विश्वास व्यक्ति को मुश्किल दौर से निकलने की ताकत देता है.

चंद्रमा और मूलांक 2 का सुंदर संयोग, जानें आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा शुक्रवार

भावनाओं और समझदारी के मेल को 20 फरवरी के दिन के तौर पर देखा जा रहा है। शुक्रवार का स्वामी शुक्र है और आज का मूलांक 2 है। इनका स्वामी चंद्रमा है। यह संयोग रिश्तों में सुधार करने और अटके हुए कामों को शांति से निपटाने के लिए बहुत अच्छा माना जा रहा है। अगर किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं या किसी पुराने विवाद को सुलझाना चाहते हैं तो सितारों की चाल आपके पक्ष में है।

मीन राशि में चंद्रमा का गोचर होने के कारण लोगों में करुणा और दूसरों की मदद करने की भावना बढ़ेगी। यह समय केवल भागदौड़ का नहीं बल्कि थोड़ा रुककर अपने मन की सुनने और अपनी रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा देने का है। आइए जानते हैं कि इस खास खगोलीय स्थिति का आपकी राशि पर क्या असर पड़ेगा।

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कैसा रहेगा राशि का हाल?

मेष राशि

आज का दिन आपके लिए बहुत अच्छा है। टीम वर्क और नई प्लानिंग से बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है।

क्या करें: अनुभवी लोगों की राय सुनें। अपनी सेहत का ख्याल रखें।

क्या न करें: किसी भी तरह की बहसबाजी और जल्दबाजी में पैसा लगाने से बचें।

वृषभ राशि

करियर के लिहाज से यह दिन काफी स्थिर रहेगा। परिवार में हंसी-खुशी का माहौल बनेगा और तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे।

क्या करें: अधूरे कामों को प्राथमिकता दें। थोड़ा दान-पुण्य करें।

क्या न करें: बिना सोचे-समझे पैसे खर्च न करें। अपने गुस्से पर काबू रखें।

मिथुन राशि

आज आपकी बातों का जादू चलेगा। नए लोगों से जुड़ना और छोटी यात्राएं करना आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है।

क्या करें: कुछ नया सीखने की कोशिश करें। पुराने दोस्तों से फिर से संपर्क साधें।

क्या न करें: सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा न करें। किसी से किया वादा न तोड़ें।

कर्क राशि

आज मन खुश रहेगा और घर में सुख-शांति बनी रहेगी। आपकी आर्थिक स्थिति में पहले से सुधार देखने को मिलेगा।

क्या करें: घर के कामों को निपटाएं। माता-पिता का आशीर्वाद लें।

क्या न करें: बहुत ज्यादा इमोशनल होकर कोई फैसला न लें और हेल्थ को लेकर कोई लापरवाही न बरतें।

सिंह राशि

आज आप अपनी काबिलियत से सबको प्रभावित करेंगे। दफ्तर में सम्मान या कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं।

क्या करें: आत्मविश्वास बनाए रखें। शारीरिक कसरत पर ध्यान दें।

क्या न करें: अपने भीतर घमंड न आने दें। दूसरों का सम्मान करें।

कन्या राशि

आज आपकी बुद्धिमानी आपको हर मुश्किल से बाहर निकाल लेगी। हेल्थ अच्छा रहेगा। साथ ही दिनभर छोटी-छोटी सफलताएं मिलती रहेंगी।

क्या करें: बारीकियों पर ध्यान दें। मन की शांति के लिए योग करें।

क्या न करें: हर काम में कमी निकालने की आदत से बचें। दूसरों की बुराई न करें।

तुला राशि

रिश्तों के मामले में आज का दिन आपके लिए शानदार है। पार्टनर के साथ तालमेल बढ़ेगा। निवेश के कुछ अच्छे अवसर मिल सकते हैं।

क्या करें: आर्ट या म्यूजिक का आनंद लें और अपनों के साथ वक्त बिताएं।

क्या न करें: निर्णय लेने में देरी न करें। सच का साथ दें।

वृश्चिक राशि

आज आपको कोई छिपा हुआ लाभ मिल सकता है। अध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा और जटिल काम आसानी से पूरे हो जाएंगे।

क्या करें: गहरी रिसर्च या खोजबीन वाले काम करें और ध्यान लगाएं।

क्या न करें: पुरानी कड़वी बातों को न दोहराएं और किसी से जलन न करें।

धनु राशि

पूरा दिन जोश और ऊर्जा से भरा रहेगा। अगर किसी लंबे सफर पर जाने की सोच रहे हैं तो आज का दिन सफलता दिलाने वाला है।

क्या करें: अपनी नॉलेज बढ़ाएं और प्रकृति के करीब समय बिताएं।

क्या न करें: जोश में आकर नियम न तोड़ें और बहस से दूर रहें।

मकर राशि

आपकी मेहनत का मीठा फल मिलने का समय आ गया है। करियर में मजबूती आएगी और आर्थिक पक्ष भी बेहतर होगा।

क्या करें: भविष्य की ठोस प्लानिंग करें और अपनी मेहनत जारी रखें।

क्या न करें: खुद को अकेला न समझें और बिना सोचे-समझे जोखिम न लें।

कुंभ राशि

आज आपको कुछ अचानक मिलने वाली खुशियां मिल सकती हैं। नए लोगों से दोस्ती भविष्य में आपके बड़े काम आएगी।

क्या करें: सोशल नेटवर्किंग बढ़ाएं और नई तकनीक का इस्तेमाल करें।

क्या न करें: मन को भटकने न दें और अपनी व्यक्तिगत बातें गुप्त रखें।

मीन राशि

आज आप सितारों के राजा हैं! चंद्रमा आपकी ही राशि में है, जिससे आपका आत्मविश्वास और भाग्य दोनों सातवें आसमान पर रहेंगे।

क्या करें: अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करें और आराम भी करें।

क्या न करें: जरूरत से ज्यादा भावुक होने से बचें और बड़े फैसलों को कल पर टाल दें।

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

ईरान से कच्चे तेल पर छूट, भारत ने तुरंत की पहली डील

नई दिल्ली। तेल की बढ़ती कीमतों के बीच हाल ही में अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दे दी है। इस छूट के बाद भारत ने ईरान से तेल खरीद को लेकर पहली डील पक्की कर ली है। यह डील 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद को लेकर हुई है। हालांकि, यह सौदा भारत को काफी महंगा साबित हुआ है।
दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करने वाली भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरान के साथ तेल खरीद की डील की है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरान का 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। सूत्र ने बताया कि इस कच्चे तेल की कीमत वैश्विक क्रूड बेंचमार्क ब्रेंट फ्यूचर्स के मुकाबले करीब 7 डॉलर प्रति बैरल अधिक पर तय हुई। हाल के वर्षों में चीन की रिफाइनरियां भारी मात्रा में ईरानी तेल खरीदती रही हैं। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते चीन तक यह तेल ब्लैक मार्केट के जरिए पहुंचता है और अक्सर इस किसी दूसरे देश के तेल के रूप में रीब्रांड कर बेचा जाता है।
अमेरिकी प्रशासन ने शुक्रवार को समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी। यह छूट उन जहाजों पर लदे तेल पर लागू होती है, जो 20 मार्च तक लोड हो चुके हैं और 19 अप्रैल तक बंदरगाहों पर उतारे जाएंगे।
ईरानी कंपनी के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज का समझौता भारत की मई 2019 के बाद ईरानी तेल की पहली खरीद है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत ने ईरान से तेल खरीद बंद की थी। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता भारत ने ईरान से तेल की यह खरीद तब की है, जब मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते तेल की किल्लत जारी है। भारतीय रिफाइनरियों ने इस महीने सप्लाई की कमी को कम करने के लिए अमेरिका की छूट के बाद 4 करोड़ बैरल से ज्यादा रूसी कच्चा तेल खरीदा है।
सूत्रों के अनुसार, भारत के साथ-साथ एशिया के अन्य देश भी ईरान का कच्चा तेल खरीदने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, चीन की प्रमुख रिफाइनिंग कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी ईरानी तेल खरीदने की योजना नहीं बना रही है।
ईरान का कच्चा तेल भारत तक आम तौर पर समुद्री रास्ते से पहुंचता है, और इसका सबसे अहम मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। हालांकि, यह साफ नहीं हुआ है कि भारत ने ईरान से जो तेल खरीदा है, उसकी डिलीवरी कब होगी। ईरान के तेल टर्मिनल (जैसे खार्ग द्वीप) से तेल टैंकर निकलते हैं। ये टैंकर पहले दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज से गुजरते हैं। इसके बाद जहाज अरब सागर के जरिए सीधे भारत के पश्चिमी तट (जैसे गुजरात के जामनगर, मुंबई आदि बंदरगाह) तक पहुंचते हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान ने इस समुद्री रास्ते को बंद कर रखा है। हालांकि, भारत जैसे कुछ देशों के कुछ टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने की इजाजत मिली हुई है।

ईरान ने सस्ते ड्रोन से दुबई एयरपोर्ट के पास धमाका कैसे किया? देखिए

ईरान ने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाकर बड़ा ड्रोन हमला किया है। ड्रोन हमले की वजह से अचानक भीषण आग लग गई। ड्रोन एयरपोर्ट के बेहद नजदीक खड़े फ्यूल टैंक पर गिरा, जिसके बाद आग धधक उठी।

सिविल डिफेंस टीमों ने जैसे-तैसे कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। हमले में कोई घायल नहीं हुआ है लेकिन यह नुकसान बड़ा हो सकता था। हमले के बाद बाद दुबई एयरपोर्ट की फ्लाइट्स को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। कराची, काठमांडू, हनोई से आने वाली उड़ानों को फिलहाल होक दिया गया है।

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आग में धधकता दिख रहा है टैंक

सोशल मीडिया पर आग और धुएं के वीडियो वायरल हो रहे हैं। अभी यह साफ नहीं है कि ड्रोन किस तरफ से लॉन्च किया गया था, लेकिन रिपोर्ट्स में इसे ईरानी ड्रोन अटैक से जोड़ा जा रहा है। ईरान खाड़ी के देशों पर अपने सैन्य हमले बढ़ा रहा है।

दुबई पर हमले क्यों कर रहा है ईरान?

ईरान का दावा है कि UAE अपने सैन्य अड्डों और बंदरगाहों का उपयोग अमेरिकी और इजरायली सेनाओं को ईरान पर हमला करने के लिए करने दे रहा है। ईरान ने साफट चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिका को अपनी जमीन इस्तेमाल करने देगा, वह उसका वैध लक्ष्य होगा।

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दुबई पर हमला करने से क्या होगा?

दुबई दुनिया का एक बड़ा व्यापारिक और पर्यटन केंद्र है। यहां हमला करके ईरान वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता पैदा करना चाहता है। ईरान का जोर है कि वैश्विक समुदाय अमेरिका और इजरायल पर जंग रोकने के लिए दबाव बनाए।

हमलों की वजह से क्या हो रहा है?

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानें कई बार निलंबित की गई हैं। होटल और रियल एस्टेट सेक्टर को भारी नुकसान हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर बढ़ गई हैं।

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दोस्त था दुबई, फिर दुश्मन कैसे बना?

ईरान, UAE और इजरायल के बीच बढ़ते राजनयिक और सुरक्षा संबंधों से नाराज है। ईरान का कहना है कि इजरायल से दोस्ती, खाड़ी के देशों के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। इजरायल और अमेरिका की नजर सिर्फ तेल के खजाने पर रहती है।

UAE रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ईरान की तरफ से अब तक हजारों ड्रोन और मिसाइलें दागी गई हैं। ज्यादातर को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया है। उनके मलबे से नागरिक और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

तेहरान और अमेरिका के बीच शांति के लिए मध्यस्थता वाली खबरें फेक: ईरान

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग जल्द ही शांति में बदल जाएगी। इसके लिए कई देश मध्यस्थता कर रहे हैं और बातचीत कर शांति बहाल हो जाएगी। इस तरह की राहत भरीं खबरें हकीकत में बदलतीं इससे पहले ही ईरान ने साफ कर दिया कि ये सिर्फ अटकलें और भ्रामक खबरें है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने सीधे संवाद की खबरों को खारिज करते हुए इन्हें फेक न्यूज करार दिया। ईरान का रुख फिलहाल सख्त बना हुआ है, लेकिन अमेरिका के इस रुख के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। भले ही ईरान ने प्रस्ताव मिलने की बात स्वीकार की है, लेकिन अंतिम समझौते तक पहुंचने की राह अब भी कूटनीतिक दांव-पेचों में फंसी नजर आती है। वहीं दूसरी तरफ बताया जा रहा है कि ईरान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि उन्हें मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका की ओर से कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव मिले हैं।
इधर खबरें चल रहीं है कि ईरान इन प्रस्तावों की गंभीरता से समीक्षा कर रहा है। अधिकारी के अनुसार, अमेरिका की ओर से भेजे गए कुछ बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि लंबे समय से जारी गतिरोध और प्रत्यक्ष टकराव के बावजूद दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक संवाद का रास्ता खुला है। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई थी। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष जारी है और इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन अब ईरान ने भी स्वीकार किया है कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका का प्रस्ताव उन तक पहुंचा है। इससे पहले ईरान किसी भी तरह की बातचीत से इनकार करता रहा था। बताया जा रहा है कि अमेरिका की ओर से ईरान को 15 बिंदुओं का एक ड्राफ्ट भेजा गया है, जिसमें तनाव कम करने की रूपरेखा तैयार की गई है। क्षेत्रीय शांति के लिए तुर्की और मिस्र जैसे देश सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान से फोन पर चर्चा की है। फिदान ने कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ भी संपर्क साधा है। दूसरी ओर, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी ने भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने ईरान को तनाव कम करने के लिए कड़े संदेश भेजे हैं। मिस्र के अधिकारियों के अनुसार, इन संदेशों का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकना है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़े संकट से बचाया जा सके। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक चौंकाने वाले बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है, जिसके बाद उन्होंने ऊर्जा ढांचों पर होने वाले संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का निर्णय लिया। ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत बेहद मजबूत रही है और लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन सकती है।

गोद लेने पर भी मिल जाएगी मैटरनिटी लीव, सुप्रीम कोर्ट ने हटाया 3 महीने वाला नियम

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ‘मातृत्व अवकाश’ को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। इसमें कहा कि अब बच्चा गोद लेने वाली सभी माताओं को मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। शीर्ष कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उस कानूनी प्रावधान को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत 3 महीने तक के बच्चे को गोद लेने पर ही अवकाश मिलने की व्यवस्था की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पुराने कानूनी नियम को गैर-संवैधानिक घोषित कर दिया और इसे समानता के अधिकार (संविधान के अनुच्छेद 14) का हनन माना है। बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो सभी गोद लेने वाली माताएं गोद लेने की तारीख से 12 हफ्ते की छुट्टी की हकदार होंगी। कोर्ट ने कहा कि पुराना नियम मां और बच्चे दोनों के लिए भेदभाव वाला है।

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कोर्ट ने यह भी कहा है कि मातृत्व एक मौलिक मानव अधिकार है। उसे इस तरह की सीमा में नहीं बांधा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने कहा, ‘गोद लेना परिवार बनाने का एक उतना ही अच्छा तरीका है… बायोलॉजिकल फैक्टर सिर्फ परिवार के मूल्यों और हकों को तय नहीं कर सकते।’ बेंच ने गोद लिए गए बच्चे के अधिकार की चर्चा अपने फैसले में की है। उन्होंने कहा है कि मां का प्यार पाना बच्चे का अधिकार है। उसे नए परिवार से जुड़ने में समय लगता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बच्चे और अभिभावकों को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार है, लेकिन यह कानून उसका भी उल्लंघन करता है।

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केंद्र सरकार से विचार करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सामाजिक कल्याण के तरीके के तौर पर मातृत्व अवकाश शुरू करने पर विचार करे। याचिकाकर्ता ने मूल रूप से 1961 के मैटरनिटी बेनेफिट एक्ट 1961 की धारा 5(4) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि 2020 में लागू सोशल सिक्योरिटी कोड ने 1961 के कानून की जगह ले ली है। इसकी धारा 60(4) में वही लिखा है, जो 1961 के कानून की धारा 5(4) में था।

कोर्ट ने रद्द करदी धारा

2020 के सोशल सिक्योरिटी कोड की धारा 60(4) में बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं को अधिकतम 12 सप्ताह की मातृत्व अवकाश का प्रावधान है, मगर यह लाभ उन्हीं महिलाओं के लिए है जिन्होंने 3 महीने से कम आयु का बच्चा गोद लिया हो। इसी धारा को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया।

शहर में अकेला महसूस करते हैं आप? इन ऐप्स पर पैसे देकर कर सकते हैं दोस्ती

आज के दौर में बड़े शहरों में एक अजीब नजारा देखने को मिल रहा है। सड़कों पर भीड़ तो बहुत है लेकिन लोगों के दिलों में बहुत अकेलापन है। इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए अब एक नया बिजनेस शुरू हो गया है, पैसे देकर दोस्ती खरीदना। इसे ‘पेड फ्रेंडशिप’ कहते हैं, जहां आप किसी अजनबी को अपना दोस्त बनाने के लिए उसे सैलरी या फीस देते हैं।

बड़े शहरों में रहने वाले बहुत से लोग ऐसे हैं जो दिन भर काम में डूबे रहते हैं। जब शाम को वे घर लौटते हैं, तो उनके पास बात करने वाला कोई नहीं होता। पुराने दोस्त अपनी जिंदगी में बिजी हैं और परिवार कहीं दूर रहता है। ऐसे में लोग इंटरनेट का सहारा लेते हैं और अपने खालीपन को भरने के लिए Vybout, Friendy और Friend On Rent India जैसी वेबसाइट्स और ऐप्स पर जाते हैं जहां ‘दोस्त’ किराये पर मिलते हैं।

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इन ऐप्स की शुरुआत कैसे हुई?

इसकी शुरुआत जापान जैसे देशों में ‘Rent-a-Family’ के कॉन्सेप्ट से हुई थी, जो धीरे-धीरे भारत पहुंचा। भारत में Friend On Rent India जैसी वेबसाइट्स पिछले 5-6 सालों से सक्रिय हैं लेकिन इनका असली उछाल 2020 के लॉकडाउन के बाद आया, जब लोगों ने अकेलेपन का सबसे डरावना चेहरा देखा।

1.RentAFriend

इस पूरे बिजनेस की नींव रखने वाला सबसे बड़ा नाम ‘RentAFriend’ है। इसकी शुरुआत 2009 में अमेरिका में स्कॉट रोसेनबाम ने की थी। स्कॉट ने महसूस किया कि दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां लोग सिर्फ प्लेटोनिक (बिना किसी रोमांस के) दोस्ती के लिए मिल सकें। आज यह वेबसाइट दुनिया भर में मौजूद है और भारत के बड़े शहरों में भी इसका काफी इस्तेमाल होता है। यह एक सब्सक्रिप्शन मॉडल पर चलता है, जहां आप पैसे देकर हजारों ‘फ्रेंड्स’ की लिस्ट देख सकते हैं।

2. Friend On Rent India

भारत में जब इस तरह की चीजों को अजीब माना जाता था, तब Friend On Rent India जैसी वेबसाइट्स ने कदम रखा। इसकी शुरुआत लगभग 2017-18 के आसपास हुई थी। इन्होंने महसूस किया कि मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में IT प्रोफेशनल्स और कॉलेज स्टूडेंट्स के बीच अकेलापन एक बीमारी की तरह फैल रहा है। इस साइट ने लोगों को एक मौका दिया कि वे अपनी प्रोफाइल लिस्ट करें और प्रति घंटा 300 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक कमाएं।

3. Vybout

यह ऐप पिछले 3-4 सालों में, खासकर पोस्ट-कोविड दौर में बहुत तेजी से उभरा है। इसकी शुरुआत एक ‘सोशल डिस्कवरी’ प्लेटफॉर्म के तौर पर हुई थी। इसका आईडिया बहुत सिंपल था, अगर आप अकेले बोर हो रहे हैं तो आपके पास एक ‘Vibe Buddy’ होना चाहिए। जहां आप अपनी पसंद की एक्टिविटी (जैसे जिम, मूवी या डिनर) के लिए साथी ढूंढ सकते हैं। यह ऐप आज की जेनरेशन को बहुत पसंद आता है क्योंकि इसका इंटरफेस बहुत मॉडर्न है और यह दिल्ली-NCR जैसे इलाकों में काफी एक्टिव है।

4. Friendy

इसकी शुरुआत कुछ साल पहले हुई और इसका मुख्य उद्देश्य था ‘सुरक्षित दोस्ती’। अक्सर इन प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा को लेकर सवाल उठते थे, तो Friendy ने पूरी तरह से ‘वेरिफाइड’ प्रोफाइल्स पर काम किया। यहां लोग सिर्फ बातचीत करने, नई भाषा सीखने या साथ में वर्कआउट करने के लिए दोस्त ढूंढते हैं।

5. 7 Cups

7 Cups पूरी तरह से ‘फ्रेंड रेंटल’ नहीं है, लेकिन यह इस इकॉनमी का एक बड़ा हिस्सा है। यह 2013 में शुरू हुआ था। यहां लोग ‘Listeners’ को पैसे देते हैं ताकि वे उनकी बातें सुन सकें। आज के युवा जो डिप्रेशन या स्ट्रेस से जूझ रहे हैं, वे इस ऐप पर ‘पेड लिसनर्स’ से घंटों बातें करते हैं।

किन शहरों में है सबसे ज्यादा क्रेज?

यह बिजनेस मुख्य रूप से उन शहरों में फल-फूल रहा है जिन्हें हम ‘पैसे की दौड़ वाला शहर’ कहते हैं।

मुंबई: यहां लोग काम में इतने व्यस्त हैं कि उनके पास खुद के लिए भी वक्त नहीं है। यहां ‘Movie Companion’ की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है।

बेंगलुरु: टेक हब होने के नाते यहां के युवा सबसे ज्यादा अकेलेपन का शिकार हैं। यहां लोग ‘Weekend Buddies’ सबसे ज्यादा रेंट पर लेते हैं।

दिल्ली-NCR: यहां दिखावे की संस्कृति ज्यादा है, इसलिए शादियों और हाई- प्रोफाइल पार्टियों के लिए ‘फेक फ्रेंड्स’ की बुकिंग यहां सबसे ज्यादा देखी जाती है।

क्या है इसके पीछे का सच?

यह साइलेंट ‘लोनलीनेस इकॉनमी’ दिखाती है कि हम अपनी भावनाओं को भी अब एक प्रोडक्ट की तरह बेच रहे हैं। यह एक ऐसा चक्र है जहां हम पैसे कमाने के चक्कर में अपनों से दूर हुए और अब उसी पैसे से किसी अजनबी का वक्त खरीद रहे हैं। ये ऐप्स भले ही आपको कुछ घंटों की खुशी दें लेकिन ये अकेलेपन का इलाज नहीं हैं, जिसे आज की पीढ़ी अपने अंदर दबाए बैठी है।

सोनिया गांधी की तबीयत बिगड़ी, सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती, डॉक्टरों ने दी जानकारी

नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते मंगलवार (24 मार्च) देर रात दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें सीने में जकड़न और सांस लेने में हल्की तकलीफ महसूस हो रही थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें निगरानी में रखने का फैसला किया.

दिल्ली में बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण की वजह से उनकी तबीयत पर असर पड़ा है. डॉक्टरों की एक टीम उनके स्वास्थ्य की बारीकी से जांच कर रही है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उनका ब्रोंकियल अस्थमा थोड़ा बढ़ गया है, जो ठंडी हवा और धूल के कारण अक्सर सक्रिय हो जाता है. अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अजय स्वरूप ने संक्षिप्त जानकारी देते हुए बताया कि सोनिया गांधी की स्थिति फिलहाल स्थिर है. उन्हें एहतियात के तौर पर भर्ती किया गया है और उन्हें एंटीबायोटिक्स व अन्य जरूरी दवाएं दी जा रही हैं.

79 वर्षीय सोनिया गांधी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं. जनवरी माह में इससे पहले भी उन्हें सांस संबंधी दिक्कत के कारण भर्ती होना पड़ा था. जून 2025 में उन्हें पेट में संक्रमण के कारण अस्पताल में कुछ दिन बिताने पड़े थे. सितंबर 2022 में उन्होंने इलाज के लिए विदेश की यात्रा भी की थी. फिलहाल, डॉक्टर उनकी रिकवरी पर नजर रख रहे हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि एक-दो दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है.

ईरान पर अकेला पड़ा अमेरिका, NATO और चीन को धमका रहे ट्रंप, नई मुसीबत की आहट?

इजरायल, अमेरिका और ईरान की जंग, दुनिया के मुसीबत बनकर आ रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही ईरान ने रोक दी है, जिसकी वजह से कई देशों में तेल और गैस संकट पैदा हो गया है। ईरान के साथ जारी जंग अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने की बजाय बड़े देश, अमेरिकी नीति से दूरी बना रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप, कई देशों को अपने टैरिफ से नाराज कर चुके हैं, ऐसे में उनके साथ किसी की भी हमदर्दी नहीं है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) के सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर NATO के सदस्य देश होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने में अमेरिका की मदद नहीं करते हैं तो संगठन का भविष्य बहुत बुरा हो सकता है।

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NATO को क्यों धमकाने लगे ट्रंप?

ईरान ने जंग शुरू होने के बाद से ही इजरायल और अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। अब वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। अचानक तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ने लगीं हैं। अब कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
यह ठीक है कि जो देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मुनाफा हासिल करते हैं, वे इसे सुरक्षित रखने में मदद करें। अगर कोई जवाब नहीं आता या नकारात्मक जवाब आता है तो NATO का भविष्य बहुत बुरा होगा। अब सहयोगियों को अमेरिका की मदद करनी चाहिए, नहीं तो NATO एकतरफा सड़क बन जाएगा।

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डोनाल्ड ट्रंप की यह धमकी NATO के भीतर तनाव बढ़ा रही है। संगठन का मकसद सदस्य देशों की रक्षा करना है, न कि किसी सदस्य की ओर से छेड़ी गई जंग में उस देश की मदद करना। अमेरिका की मदद करने से NATO के देश इसी वजह से कतरा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस और दूसरे यूरोपीय देशों जंगी जहाज भेजे जाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई भेजने को तैयार नहीं है। अब फारस की खाड़ी में अमेरिका कमजोर पड़ रहा है।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI

NATO का क्या बिगाड़ सकते हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप की इस आक्रामक रणनीति से नई मुसीबत की आहट सुनाई दे रही है। NATO सहयोगी इस दबाव को NATO की एकता के लिए खतरा मान रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की मदद का हवाला देते हुए कहा कि अब सहयोगियों को अमेरिका की मदद करनी चाहिए। अगर NATO में फूट पड़ती है तो अमेरिका के लिए भी यह जोखिम है।

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इजरायल के लिए जंग लड़ रहा अमेरिका?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य लक्ष्य समान हैं। इजरायल ने कहा है कि उसकी कार्रवाई कम से कम तीन सप्ताह और जारी रहेगी। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि युद्ध कुछ हफ्तों में समाप्त हो सकता है। ईरान ने 700 मिसाइल और 3,600 ड्रोन हमलों का दावा किया है। अब इस जंग पर अमेरिका में ही डोनाल्ड ट्रंप का विरोध हो रहा है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। Photo Credit: IDF

चीन को क्यों धमकाने लगे हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप, अब चीन पर दबाव बढ़ाने लगे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से सीधे अपील की कि वह होर्मुज स्ट्रेट में सहयोग करे, क्योंकि चीन अपनी 90 प्रतिशत तेल इसी राह से हासिल करता है। उन्होंने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को टाल सकते हैं, अगर चीन अपना रुख साफ नहीं करता है।

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
चीन को भी मदद करनी चाहिए। हम स्थिति जानना चाहते हैं, क्योंकि दो सप्ताह लंबा समय है। हम इसे टाल सकते हैं।

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अलग पड़ गए हैं डोनाल्ड ट्रंप?

ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने डोनाल्ड ट्रंप की मांग पर तटस्थ रुख अभी तक अपनाया है। अमेरिका की मदद करने के लिए कोई तैयार नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से भी अपील की है कि वह इस संकट में सहयोग करे, क्योंकि चीन अपनी तेल की जरूरतों के लिए इस रूट पर निर्भर है। डोनाल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से जिन देशों को लाभ मिलता है, उन्हें अमेरिका की मदद करनी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने दावा किया है कि ब्रिटेन ने तुरंत मदद नहीं की।

NATO देश भी अमेरिका की मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। Photo Credit PTI

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नया खतरा क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप का जैसा रुख है, कोई देश उनकी मदद करने के लिए तैयार नहीं है। वह खीजकर एक बार फिर टैरिफ बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं, आर्थिक प्रतिबंध बढ़ा सकते हैं, जिसकी वजह से अमेरिका पर निर्भर देशों में आर्थिक अस्थिरता और बढ़ सकती है। डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही पश्चिम एशिया को जंग के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

खाड़ी के देशों को ईरान तबाह कर रहा है, इजरायल की राजधानी येरुशलम में बम मार रहा है, खाड़ी के तेल ठिकानों को निशाना बना रहा है। कुवैत पर भी ईरान की टेढ़ी नजर है। अगर यह जंग कुछ दिन और चली तो भारत जैसे देश में भी पेट्रोलियम संकट पैदा हो सकता है।