- जिला बदर अपराधियों पर रखें कड़ी नजर, चार्जशीट शीघ्र करें दाखिल,मजबूत तथ्यों के साथ पैरवी कर अपराधियों को दिलाये सजा:- जिलाधिकारी
मऊ। जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में कानून व्यवस्था एवं अभियोजन शाखा की मासिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जून माह के दौरान अभियोजन शाखा की प्रगति, विभिन्न न्यायालयों में वादों के निस्तारण तथा कानून-व्यवस्था से संबंधित मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में संयुक्त निदेशक अभियोजन ने बताया कि जून माह में सत्र न्यायालय में आईपीसी के 22 मुकदमों का निस्तारण हुआ, जिनमें 6 में सजा तथा 16 में अभियुक्तों की रिहाई हुई। अन्य अधिनियम के 2 मुकदमों में एक में सजा तथा एक में दाखिल दफ्तर हुआ। एससी/एसटी एक्ट में कोई मुकदमा निस्तारित नहीं हुआ, जबकि गैंगस्टर एक्ट के एक मुकदमे का निस्तारण हुआ, जिसमें सजा नहीं हो सकी। पॉक्सो एक्ट के 3 मुकदमों में 2 में सजा तथा 1 में रिहाई हुई।
अधीनस्थ न्यायालयों में आईपीसी के 101 मुकदमों का निस्तारण हुआ, जिनमें 34 में सजा, 20 में रिहाई तथा 22 में सुलह हुई। अन्य अधिनियमों के 167 मुकदमों का निस्तारण किया गया, जिनमें सभी में सजा हुई। इस प्रकार जून माह में अधीनस्थ एवं सत्र न्यायालयों में कुल 296 मुकदमों का निस्तारण हुआ, जिनमें 210 में सजा, 37 में रिहाई, 22 में सुलह तथा शेष मामलों में सत्र सुपुर्द एवं दाखिल दफ्तर की कार्रवाई हुई।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जघन्य अपराधों में शीघ्र सजा सुनिश्चित कराने के निर्देश देते हुए कहा कि विशेष रूप से फास्ट ट्रैक कोर्ट में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी कर अपराधियों को जल्द से जल्द दंडित कराया जाए। उन्होंने रिहाई वाले मामलों में पक्षद्रोहिता एवं अन्य कारणों की जांच कर उनके निराकरण हेतु ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने अन्य अधिनियमों के अंतर्गत लंबित वादों के अपेक्षाकृत कम निस्तारण पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वादों के निस्तारण की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्रवाई की जाए। गंभीर मामलों में रिहाई एवं जमानत की बढ़ती संख्या पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने पुलिस एवं अभियोजन विभाग को बेहतर समन्वय स्थापित कर सशक्त साक्ष्यों के साथ प्रभावी पैरवी करने के निर्देश दिए, जिससे अधिक से अधिक अपराधियों को सजा दिलाई जा सके तथा जमानत निरस्त कराने के प्रयास किए जाएं।
एससी/एसटी एक्ट में जून माह के दौरान एक भी मुकदमे का निस्तारण न होने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इस श्रेणी के मामलों के शीघ्र निस्तारण हेतु विशेष कार्ययोजना बनाकर मजबूत तथ्यों एवं साक्ष्यों के साथ प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस एवं अभियोजन का प्रमुख उद्देश्य अपराधियों को कानून के अनुसार दंडित कराना है, इसलिए दोनों विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जहरीली एवं अवैध शराब के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस एवं आबकारी विभाग की संयुक्त टीम गठित कर संवेदनशील एवं संदिग्ध स्थानों पर लगातार छापेमारी एवं कार्रवाई करने को कहा।
बैठक में महिला उत्पीड़न, गैंगस्टर एक्ट, एससी/एसटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट एवं गुंडा एक्ट के अंतर्गत जून माह में की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। एससी/एसटी एक्ट, महिला उत्पीड़न एवं गैंगस्टर एक्ट के मामलों में चार्जशीट दाखिल करने में देरी पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए समस्त क्षेत्राधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को समयबद्ध ढंग से चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए।
इसके अतिरिक्त गत माह में हुई लूट, डकैती, हत्या, चोरी एवं अन्य अपराधों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने गैंगस्टर एक्ट के मामलों में पुलिस पक्ष को सशक्त एवं तथ्यों पर आधारित रखने के निर्देश दिए। साथ ही गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर किए गए अपराधियों की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि वे पुनः किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त न हो सकें।
बैठक में पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर, अपर जिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, संयुक्त निदेशक अभियोजन, समस्त उप जिलाधिकारी, समस्त क्षेत्राधिकारी, समस्त थाना प्रभारी एवं अन्य संबंधित जनपद स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।












