बहराइच के जरवल में माह-ए-मुहर्रम के पवित्र दिनों में सैयद-उश-शोहदा हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की याद में अजादारी का सिलसिला पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ जारी है। जरवल में मुहर्रम के दौरान सुबह से देर रात तक मजलिसों का आयोजन हो रहा है, जहां बड़ी संख्या में अजादार पहुंचकर कर्बला की कुर्बानी और इंसानियत के पैगाम को याद कर रहे हैं। जरवल में अजादारी की शुरुआत रोजाना सुबह 8:30 बजे बाजार वाले इमामबाड़े से होती है। इसके बाद दिनभर करीब 30 से अधिक घरों और इमामबाड़ों में मजलिसें आयोजित की जाती हैं। यह सिलसिला देर रात कैसर मिर्जा के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होता है। इन मजलिसों में उलेमा और जाकिरीन कर्बला के शहीदों की महान कुर्बानी, हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के सब्र, सच्चाई और इंसाफ के संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाल रहे हैं। क्षेत्र के प्रमुख उलेमा और जाकिरीन अपनी तकरीरें पेश कर रहे हैं। इनमें मौलाना मिर्जा वसीम आलम, जाकिर-ए-अहलेबैत सैय्यद पुरनूर हैदर जरवली, मेंहदी हसन और खादिम अब्बास हैदर प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये वक्ता अपने संबोधन के माध्यम से इमाम हुसैन (अ.स.) के संदेश और कर्बला की अजीम कुर्बानी को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इसी क्रम में, आज अंजुमन हुसैनिया असगरिया के सद्र कैसर अब्बास उर्फ चांद मियां के आवास पर एक विशेष मजलिस का आयोजन किया गया। इस मजलिस को जाकिर-ए-अहलेबैत सैय्यद पुरनूर हैदर ने प्रभावशाली अंदाज में मजलिस पढ़ी। इस मजलिस में नियाज अहमद, सुरूर हुसैन, शावेज काजमी, मोनीस सभासद, एडवोकेट अब्बास मेहदी, डॉ. सफी हैदर, असद इकबाल रजा, शाहिद परवेज, असगर जैन, नाजिर नौहाख्वान, मिर्जा कमर हुसैन और नवाब हैदर सहित कई लोग मौजूद रहे। इस दौरान कर्बला के दर्दनाक मसायब और शहीदों की बेमिसाल कुर्बानियों का जिक्र किया गया, जिसे सुनकर अजादार भावुक हो उठे। मजलिस के बाद नौहाख्वानी और सीनाजनी के जरिए बारगाह-ए-हुसैन (अ.स.) में अकीदत का नजराना पेश किया गया।
जरवल में मुहर्रम की अजादारी जारी:कर्बला के शहीदों को किया याद,सुबह से देर रात तक हो रही मजलिसें
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