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बस्ती जिले के विक्रमजोत विकास खंड स्थित भौसिया गांव में सरयू नदी पर स्थापित चौधरी चरण सिंह पंप नहर अयोध्या इस बार भी सूखी है। बारिश के दिनों को छोड़कर किसानों को नहर के पानी के लिए तरसना पड़ता है, जिससे उन्हें महंगे संसाधनों का उपयोग करना पड़ता है। पानी की कमी के कारण गन्ना, गेहूं और धान सहित अन्य फसलें अक्सर सूखे का शिकार हो जाती हैं। किसानों को अपनी फसलें बचाने के लिए महंगे सिंचाई साधनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। यह पंप नहर केवल सरयू नदी में बाढ़ आने पर ही चलती है। हर्रैया और सदर तहसील क्षेत्रों में इस नहर का 267 किलोमीटर का विस्तृत संजाल है, लेकिन किसानों को जब इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है, तब यह सूखी रहती है। यदि सरयू नदी में समय पर बाढ़ आ जाए तो केवल खरीफ के मौसम में ही सिंचाई हो पाती है, जबकि रबी के सीजन में यह नहर पूरी तरह सूखी रहती है। आश्चर्यजनक बात यह है कि 2007 के बाद से टेढ़ी नदी और पंप कैनाल के बीच की सिल्ट हटाई ही नहीं गई है। इस नहर प्रणाली से विक्रमजोत विकास खंड के साथ-साथ दुबौलिया, परशुरामपुर और कुदरहा विकास खंडों की कुल 47,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने की व्यवस्था है। सीजन में पंप कैनाल न चलने से किसान असहाय महसूस करते हैं और उन्हें स्वयं सिंचाई का इंतजाम करना पड़ता है। चौधरी चरण सिंह अयोध्या पंप नहर का निर्माण वर्ष 1999-2000 में हुआ था और इसका संचालन 2004-05 में शुरू हुआ। इसकी क्षमता 600 क्यूसेक है। कुल जल वितरण प्रणाली 267 किलोमीटर लंबी है, जिसमें मुख्य नहर की लंबाई 49.50 किलोमीटर और रजवाहे व अल्पिकाएं 217.50 किलोमीटर हैं। इससे विक्रमजोत, परशुरामपुर, कप्तानगंज, दुबौलिया और कुदरहा विकास खंडों के किसान लाभान्वित होने चाहिए। स्थानीय किसानों जैसे देवेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, ओमप्रकाश तिवारी, राजकुमार दूबे, बृजलाल गुप्ता, जगदम्बा प्रसाद तिवारी, प्रमोद तिवारी, जगदंबा यादव और छोटेलाल यादव का कहना है कि इस नहर से उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा है। चौधरी चरण सिंह पंप नहर पूरी तरह निष्प्रयोज्य साबित हो रही है, जिससे जनता का करोड़ों रुपया व्यर्थ चला गया है।
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विक्रमजोत पंप कैनाल में पानी नहीं:हर्रैया-सदर तहसील की 267 किमी नहर किसानों की जरूरत पर सूखी
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