श्रावस्ती के नासिरगंज कस्बे में 8 मोहर्रम के मौके पर आयोजित मजलिस-ए-अज़ा में अकीदत और अज़ादारी का विशेष माहौल देखने को मिला। अज़ाखाना परवेज़ रिज़वी साहब में बड़ी संख्या में पहुंचे अज़ादारों ने इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान कर्बला मुकद्दस से आए अलम की ज़ियारत आकर्षण का केंद्र रही। अज़ाखाना में जुटे बड़ी संख्या में अज़ादार 8 मोहर्रम के अवसर पर नासिरगंज कस्बे के अज़ाखाना परवेज़ रिज़वी साहब में मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कर्बला से आए अलम की हुई ज़ियारत मजलिस के दौरान कर्बला मुकद्दस से आए अलम की ज़ियारत कराई गई। अलम के दर्शन के लिए अज़ादारों की भीड़ उमड़ी और लोगों ने अकीदत के साथ दुआएं मांगीं। कर्बला के वाक़ियात का हुआ बयान मजलिस में मौजूद ज़ाकिर ने कर्बला की घटनाओं और अहलेबैत की कुर्बानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इमाम हुसैन के संदेश को इंसानियत, सब्र और सत्य के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। इमाम हुसैन के पैगाम पर चर्चा वक्ताओं ने कहा कि कर्बला केवल इतिहास नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष और सिद्धांतों पर कायम रहने की मिसाल है। उन्होंने लोगों से इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलने का संदेश दिया। नौहाख्वानी और मातम में दिखी अकीदत मजलिस के बाद नौहाख्वानी और मातम का सिलसिला शुरू हुआ। अज़ादारों ने गम-ए-हुसैन का इज़हार करते हुए शहादत की याद को ताज़ा किया। आध्यात्मिक और गमगीन रहा माहौल पूरे आयोजन के दौरान वातावरण श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम के अंत में अमन, भाईचारे और इंसानियत के लिए दुआ की गई।
श्रावस्ती में आठवीं मोहर्रम पर गूंजा गम-ए-हुसैन:अज़ाखाना में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़, कर्बला से आए अलम की ज़ियारत
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