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हजरत मुस्लिम इब्ने अकील की शहादत पर मजलिस:मौलाना जुल्फेकार नकवी ने बयान की कुर्बानी, अकीदतमंदों ने किया मातम


श्रावस्ती के नासिरगंज कस्बे में स्थित हुसैनिया इमामबाड़े में बुधवार को 9 जिलहिज्जाह के अवसर पर हजरत मुस्लिम इब्ने अकील की शहादत की याद में एक मजलिस का आयोजन किया गया। हजरत मुस्लिम को आज से लगभग 1346 साल पहले, 9 जिलहिज्जाह 60 हिजरी को कूफा में शहीद किया गया था। इस मजलिस को खिताब करने के लिए बिहार से मौलाना जुल्फेकार हैदर नकवी विशेष रूप से पहुंचे। मौलाना ने बताया कि हजरत मुस्लिम इब्ने अकील, इमाम हुसैन के चचेरे भाई थे। इमाम हुसैन ने उन्हें कूफा के लोगों का हाल जानने और वहां के हालात का जायजा लेने के लिए अपना दूत बनाकर भेजा था। कूफा पहुंचने पर हजारों लोगों ने हजरत मुस्लिम के हाथ पर इमाम हुसैन की बैअत की, लेकिन बाद में यजीद के गवर्नर इब्ने जियाद के दबाव में आकर लोगों ने वादा खिलाफी की। मौलाना ने शहादत का वाकया बयान करते हुए बताया कि 9 जिलहिज्जाह 60 हिजरी को हजरत मुस्लिम को कूफा की मस्जिद की छत से गिराकर शहीद कर दिया गया था। उनके दोनों मासूम बेटों मोहम्मद और इब्राहिम को भी बाद में शहीद कर दिया गया। हजरत मुस्लिम कर्बला के पहले शहीद कहलाते हैं। मौलाना जुल्फेकार हैदर नकवी ने कहा, “जनाबे मुस्लिम इब्ने अकील की शहादत हक और बातिल की लड़ाई में वफादारी और कुर्बानी की एक लासानी मिसाल है। उन्होंने इमाम-ए-वक्त की खातिर अपनी जान का नजराना पेश कर दिया, जिसे कयामत तक याद रखा जाएगा।” मौलाना के दर्दभरे बयानात (मसाइब) को सुनकर इमामबाड़े में मौजूद मोमिनीनों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंज उठा। मजलिस के समापन पर नौहाख्वानी और सीनाज़नी (मातम) कर बारगाहे-रिसालत में पुरसा पेश किया गया। इस मौके पर नासिरगंज के शिया समुदाय के गणमान्य लोग, जिनमें वकार हैदर (जीनू), नाजिम हैदर, अम्मार रिजवी, शादाब हुसैन, नाजिम रिजवी, आरिफ, मीसम हुसैन, शीबू, शबाब, सिराज हैदर आदि शामिल थे, मौजूद रहे। मजलिस को शांतिपूर्ण और अकीदत के साथ संपन्न किया गया।

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