Homeदेश (National)'पहलगाम नरसंहार भूल गए...', भारत-पाकिस्तान वार्ता की पहल पर क्या कह रहे...

‘पहलगाम नरसंहार भूल गए…’, भारत-पाकिस्तान वार्ता की पहल पर क्या कह रहे हैं लोग?

भारत और पाकिस्तान के 117 प्रमुख नागरिकों ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को खुला पत्र लिखकर शांति, संवाद और सामान्य संबंध बहाल करने की अपील की है। इस पत्र में पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने, उच्चायुक्त नियुक्त करने और दोनों देशों के लोगों के बीच वीजा सुविधा शुरू करने जैसी सुझाव दिए गए हैं। |

पत्र में कहा गया है कि दोनों देश दुनिया की एक-पांचवी आबादी के घर हैं। युवा आबादी को शांति, विकास और सहयोग का भविष्य चाहिए, न कि लगातार अविश्वास और टकराव होना चाहिए। विपक्षी दलों ने भी इस प्रस्ताव पर कहा है कि पहले पाकिस्तान को बातचीत के लायक माहौल बनाना चाहिए।

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BJP ने क्या कहा है?

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा कि शांति एकतरफा नहीं हो सकती। पानी और खून साथ नहीं बह सकते। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन आतंकवाद के साथ समझौता नहीं।

कांग्रेस ने क्या कहा है?

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि पहलगाम हमले को सिर्फ एक साल दो महीने हुए हैं, जिसमें निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि पिछले 50 सालों में भारत की शांति कोशिशों का जवाब पाकिस्तान ने आतंकवाद से दिया है। ऐसे में पाकिस्तान से बातचीत की मांग समझ से परे है।

RJD ने क्या कहा है?

आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने ट्रैक-2 डिप्लोमेसी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में जो पाखंड चल रहा है, उसे खत्म करने का यही रास्ता है। उन्होंने लोगों के बीच संपर्क बहाल करने की भी बात कही।

कश्मीरी नेताओं ने क्या कहा है?

पत्र पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, मीरवाइज उमर फारूक, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती समेत कई कश्मीरी नेता और अन्य भारतीय हस्ताक्षरकर्ता शामिल हैं। मीरवाइज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की शांति के लिए भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत जरूरी है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच ट्रैक-2 बातचीत की खबरें भी आई थीं।

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चिट्ठी किसने लिखी है?

भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख व्यक्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संयुक्त खुला पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संवाद बहाल करने, जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर चर्चा फिर शुरू करने, सैन्यीकरण कम करने और शांति के लिए कदम उठाने की अपील की है। यह पत्र सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस के चेयरमैन ओपी शाह के नेतृत्व में जारी किया गया है।

चिट्ठी में क्या सुझाव दिए गए हैं?

2004-2007 के बीच तय किए गए फ्रेमवर्क को फिर से चर्चा में लाने, पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने, वीजा सेवाएं शुरू करने, परिवारों, छात्रों, कलाकारों और व्यापारियों के बीच संपर्क बहाल करने की मांग की गई है। साथ ही अटारी-वाघा सीमा, श्रीनगर-मुजफ्फराबाद और दिल्ली-लाहौर बस सेवा, कारगिल-स्कर्दू रूट खोलने तथा वाणिज्यिक उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र खोलने का आग्रह भी किया गया है।

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किन लोगों के हस्ताक्षर हैं?

पत्र पर भारत की ओर से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मीरवैज उमर फारूक, मणि शंकर अय्यर, ए.एस. दुलत, रीता मांचंदा समेत कई प्रमुख नेता, पूर्व खूफिया अधिकारी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं। पाकिस्तान से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कासूरी, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी सहित कई हस्तियों के हस्ताक्षर हैं।

मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने काफी पीड़ा सही है और उन्हें शांति, न्याय व गरिमापूर्ण समाधान चाहिए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने भी संवाद की वकालत की। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने पत्र को पाकिस्तान की कथित एजेंडे को दोहराने वाला बताया है।

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