फिरोजाबाद, स्वशासीय राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध ट्रॉमा सेंटर मैं तीमारदार अपने मरीज को अच्छा इलाज कराने के लिए लेकर आते हैं परंतु यहां पर लोगों की जेब देख कर इलाज किया जाता है
केन्द्र और प्रदेश सरकार प्रत्येक नागरिक के जीवन को बचाने के लिए करोड़ों रुपए का बजट इस महाविद्यालय से सम्बद्ध अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर को दे रही है, सरकार चाहती है,कि हर छोटे से छोटे तबके के व्यक्ति को अच्छे से अच्छा इलाज मुहैया हो सके इसके लिए सरकार ने उपचार में कार्य आने वाली छोटी बड़ी मशीनों का भी प्रबंध किया है। और डॉक्टरों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है, लेकिन उसके बावजूद भी इलाज लोगों को सही ढंग से नहीं मिल पा रहा है। सरकारी ट्रॉमा सेंटर पर यदि कोई विषाक्त खाकर आता है, तो उसके तीमारदार से यह कहकर पैसे लिए जाते हैं, कि आप पैसे नहीं दोगे तो सूचना पुलिस को भेज देंगे जिससे आपको परेशानी के साथ बदनामी भी होगी इस भय से तीमारदार पैसे देने के लिये मजबूर हो जाता है। वही किसी मरीज को यूरिन की समस्या है। तो उसके फौलीज (पेशाब की नली) डालने के लिए पैसे लिये जा रहे हैं, यदि उसने पैसे दे दिए तो फौलीज डाल दी जाती है। अन्यथा वह परेशान होकर कहीं अनियंत्रित जाने के लिए मजबूर हो जाता है। यही नहीं यदि किसी मरीज की उपचार के दौरान मौत हो जाती है। तो उसके लिए निशुल्क शव वाहन मौजूद हैं। शव गंतव्य स्थान पर पहुंचने के बाद मृतक के परिजनों से गाड़ी धुलाई के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं। ऐसा नहीं कि इन घटनाओ के संबंध में अधिकारियों को मालूम नहीं है। सब कुछ मालूम होते हुए भी वह कोई कार्यवाही नहीं करते हैं। जिससे इन लोगों के हौसले बुलंद हैं, ऐसे लोग सरकार की योजनाओं में अपने स्वार्थ के चलते पलीता लगा रहे हैं।
गौरतलब है, कभी-कभी तो रोगियों के तीमारदारों से वार्डो में पलँग उपलब्ध न होने के नाम पर भी रुपये लिए जाते है। रोगी के तीमारदार के सामने मजबूरी यह होती है, कि उसे अपने मरीज को सही कराना होता है। इस लिये उसे यह सब मजबूरीवश करना पड़ता है।
ट्रॉमा सेंटर पर बिना शुल्क के नहीं मिलता रोगियों को उपचार, शव वाहन में शव ले जाने पर धुलाई के नाम पर भी लिया जाता है पैसा
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