HomeHealth & Fitnessस्वामी चिदानन्द की मौजूदगी में संपन्न हुआ अर्धनारीश्वर मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव

स्वामी चिदानन्द की मौजूदगी में संपन्न हुआ अर्धनारीश्वर मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव

  • स्वामी गुरूशरणानन्द महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज, स्वामी ज्ञानानन्द महाराज तथा आचार्य बालकृष्ण महाराज का दिव्य सान्निध्य
  • मुरलीधर महाराज ने सभी संतों का किया अभिनन्दन

जोधपुर। राजस्थान की पावन धरती पर स्थित रघुवंशपुरम आश्रम में वैदिक मंत्रों की अनुगूँज, शंखध्वनि, घंटानाद, पुष्पवृष्टि के जयघोष के मध्य श्री अर्धनारीश्वर मन्दिर की प्राण-प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। 

इस पावन अवसर पर स्वामी गुरूशरणानन्द महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज तथा आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का दिव्य सान्निध्य प्राप्त हुआ। देश के विभिन्न भागों से पधारे संत, वेदाचार्य, श्रद्धालु इस दिव्य अनुष्ठान में सहभागी हुये।

महोत्सव के दौरान संत मुरलीधर महाराज ने सभी संतों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि यह समारोह युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करने वाली आध्यात्मिक चेतना का उत्सव है। उन्होंने कहा कि संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद सौभाग्य से प्राप्त होता है। संत समाज को जोड़ते हैं, दिशा देते हैं और जीवन को ईश्वर से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

इस अवसर पर संतों ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधनों में अर्धनारीश्वर के दिव्य स्वरूप का आध्यात्मिक संदेश देते हुये कहा कि अर्धनारीश्वर सम्पूर्ण सृष्टि के संतुलन, समानता, करुणा, शक्ति, विवेक और प्रेम का सनातन प्रतीक है। भगवान शिव चेतना हैं, शक्ति सृजन है; शिव मौन हैं, शक्ति अभिव्यक्ति है; शिव आधार हैं, शक्ति विस्तार है। दोनों का अभिन्न मिलन ही जीवन को पूर्णता प्रदान करता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि अर्धनारीश्वर का संदेश है स्वयं को आधा मत जीओ। अपने भीतर के शिवत्व को जागृत करो, अपनी शक्ति को प्रकाशित करो। जब चेतना और करुणा, विवेक और प्रेम, संकल्प और संवेदना एक हो जाते हैं, तब मनुष्य केवल सफल नहीं होता वह लोकमंगल का माध्यम बन जाता है। 

स्वामी ने कहा कि वर्तमान समय में जब परिवार, समाज और विश्व अनेक प्रकार के वैचारिक, सामाजिक एवं मानसिक संघर्षों से गुजर रहा है, ऐसे में अर्धनारीश्वर का यही संदेेश है कि स्त्री और पुरुष प्रतिस्पर्धी नहीं, परस्पर पूरक हैं। यहाँ न किसी का आधिपत्य है, न किसी की अधीनता; न विभाजन है, न संघर्ष। यहाँ केवल सम्मान है, समरसता है, सहयोग है और सह-अस्तित्व का दिव्य दर्शन है। यही सनातन संस्कृति का वास्तविक दृष्टिकोण है, जहाँ समानता से भी आगे बढ़कर एकात्मता का अनुभव कराया जाता है। श्री अर्धनारीश्वर मन्दिर की यह प्राण-प्रतिष्ठा मानवता को संतुलन, समरसता, सह-अस्तित्व और दिव्य चेतना की ओर अग्रसर करने वाला एक युगप्रेरक आध्यात्मिक उत्सव है।

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