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मंडलों, क्षेत्रीय रेलों और रेलवे बोर्ड में समर्पित पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन विभाग स्थापित किए गए: रेल मंत्री

गोरखपुर,  भारतीय रेल ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों से उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट के संग्रहण, प्रसंस्करण और निपटान के लिए एक व्यापक व्यवस्था अपनाई है। स्टेशनों पर स्रोत पर ही अपशिष्ट के संग्रहण और पृथक्करण के लिए दोहरे कूड़ेदान उपलब्ध कराए गए हैं। ट्रेनों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट का नियमित अंतराल पर नामित अपशिष्ट प्रबंधन स्टेशनों पर संग्रहण किया जाता है। इन स्टेशनों ने अपशिष्ट के उचित निपटान के लिए शहरी स्थानीय निकायों/नगर निकायों के साथ व्यवस्था की है।

इसके अलावा, भारतीय रेल ने परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न स्टेशनों पर बायोगैस संयंत्र, कम्पोस्टिंग संयंत्र तथा प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनों जैसी अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाएं भी स्थापित की हैं। बायोगैस संयंत्र 13 लगाए गए है, जिसकी क्षमता 5,095 कि.ग्रा./दिन है। कम्पोस्टिंग संयंत्र 171 लगाए गए है, जिसकी क्षमता 24,817 कि.ग्रा./दिन है। मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी 08 लगाए गए है, जिसकी क्षमता 7,725  कि.ग्रा./दिन है। प्लास्टिक बोतल क्रशिंग 858 मशीनें लगाए गए है। नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के लागू होने तथा माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन करते हुए, भारतीय रेल ने अपने विभिन्न प्रतिष्ठानों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक उपाय शुरू किए हैं।

रेलवे बोर्ड ने रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, रेलवे कॉलोनियों, अस्पतालों, कार्यशालाओं, उत्पादन इकाइयों तथा अन्य सभी रेलवे प्रतिष्ठानों को शामिल करते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। एसओपी में अपशिष्ट के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निपटान, निगरानी तंत्र तथा सभी प्रशासनिक स्तरों पर स्पष्ट रूप से निर्धारित जिम्मेदारियों के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश दिए गए हैं।

क्षेत्रीय रेलों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुसार बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आने वाली अपनी इकाइयों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भारतीय रेल के सभी प्रतिष्ठानों और ट्रेनों में वर्तमान अपशिष्ट उत्पादन का आकलन करने के लिए “एज़-इज़ वेस्ट कैरेक्टराइजेशन एंड क्वांटिफिकेशन स्टडी” की योजना बनाई गई है।

क्षेत्रीय रेलों ने अपशिष्ट प्रबंधन के लिए व्यापक कार्य-योजनाएँ तैयार करने, समय-समय पर ऑडिट कराने, कार्यान्वयन की निगरानी करने तथा नियमित रूप से रेलवे बोर्ड को अनुपालन रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए समर्पित नोडल अधिकारियों को भी नामित किया है। मंडलों को भी प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कार्य-योजनाएँ तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित मामलों की निगरानी और प्रबंधन के लिए मंडलों, क्षेत्रीय रेलों तथा रेलवे बोर्ड स्तर पर समर्पित पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन (ईएनएचएम) विभाग स्थापित किए गए हैं।

ट्रेनों में यात्रा के आरंभ से अंत तक प्रभावी स्वच्छता और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सेवा (ओबीएचएस) उपलब्ध कराई जाती है, जो वर्तमान में 1,450 (जोड़ी) लंबी दूरी की चिन्हित ट्रेनों में संचालित है।

63 स्टेशनों पर क्लीन ट्रेन स्टेशन (सीटीएस) योजना लागू की गई है, जिसके अंतर्गत 2,800 ट्रेनों को कवर किया जा रहा है। इस योजना के तहत सफाई उपकरणों से सुसज्जित कर्मचारियों की एक समर्पित टीम ट्रेन के हॉल्‍ट के दौरान कोचों के शौचालयों एवं वॉशबेसिनों की सफाई करती है तथा ट्रेनों में लगे कूड़ेदानों से कचरा एकत्र करती है।

यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री  अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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