नई दिल्ली: यूक्रेन के हमलों के बाद ईंधन की कमी का सामना कर रहा रूस अब भारत में रिफाइन किया गया पेट्रोल खरीद रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग कंपनियों के जरिए Nayara Energy द्वारा तैयार पेट्रोल की खेप खरीदी है। हालांकि, Nayara Energy ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
कैसे पहुंच रहा है भारतीय पेट्रोल रूस?
रिपोर्ट के अनुसार, रूस को पेट्रोल सीधे भारतीय कंपनियां नहीं बेच रही हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी गुरुवार को कहा कि भारत की कंपनियां सीधे रूस को ईंधन नहीं बेच रहीं, लेकिन यह संभव है कि ट्रेडिंग कंपनियों के जरिए भारत में बना ईंधन रूस तक पहुंच रहा हो। रॉयटर्स ने इससे पहले भी बताया था कि समुद्री मार्ग से भारत से रूस के लिए पेट्रोल की खेप भेजी गई है।
नायरा एनर्जी का नाम क्यों आया?
नायरा एनर्जी में रूस की सरकारी तेल कंपनी रोजनेफ्त(Rosneft) की 49% हिस्सेदारी है। यूरोपीय संघ (EU) द्वारा पिछले साल कंपनी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद नायरा एनर्जी कच्चे तेल की खरीद और रिफाइंड ईंधन के निर्यात के लिए बड़े पैमाने पर ट्रेडिंग कंपनियों पर निर्भर हो गई है। गुजरात के वाडिनार स्थित कंपनी की 4 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी फिलहाल मुख्य रूप से रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही है।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
रॉयटर्स के अनुसार, अब तक भारत से रूस के लिए कम से कम 60,000 मीट्रिक टन पेट्रोल भेजा जा चुका है। सूत्रों ने बताया कि 30,000 से 40,000 मीट्रिक टन की दो खेप रवाना की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘Agni’ नामक टैंकर ने 20 जून को वाडिनार से पेट्रोल लोड किया था। शुरुआती दस्तावेजों में इसका जगह फुजैराह (Fujairah) बताया गया था, लेकिन जहाज की ट्रैकिंग से पता चला कि वह वहां रुके बिना सुएज केनाल पार करते हुए उत्तर की ओर बढ़ गया।
फिलहाल रूस या नायरा एनर्जी की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, भारत सरकार का कहना है कि भारतीय कंपनियां सीधे रूस को पेट्रोल की बिक्री नहीं कर रही हैं।












