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संघर्ष समिति का आरोप, बिजली आपूर्ति में बाधा के लिए शीर्ष प्रबंधन जिम्मेदार

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन लगातार बिजली कर्मियों की छंटनी एवं उत्पीड़न कर रहा है, जिसके कारण बिजली आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। संघर्ष समिति का कहना है कि इन परिस्थितियों के लिए पूर्णतः शीर्ष प्रबंधन जिम्मेदार है।

संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन स्वयं अपने वर्ष 2017 के आदेश का पालन नहीं कर रहा है। उक्त आदेश में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के सभी उपकेंद्रों (सबस्टेशनों) पर संविदा कर्मियों की नियुक्ति के स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए थे।

संघर्ष समिति के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 1.5 करोड़ थी। उस समय निर्धारित मानकों के अनुसार शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक उपकेंद्र पर 36 तथा ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक उपकेंद्र पर 20 संविदा कर्मचारियों की व्यवस्था होनी चाहिए थी। वर्तमान में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर लगभग 3 करोड़ 73 लाख हो चुकी है, किंतु निजीकरण की नीति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शीर्ष प्रबंधन ने शहरी क्षेत्रों में संविदा कर्मियों की संख्या 36 से घटाकर 18.5 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 से घटाकर 12.5 कर दी है। राजधानी लखनऊ में, जहां वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है, वहां शहरी क्षेत्रों में यह संख्या घटकर मात्र 7.5 रह गई है।

संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में बिजली की मांग 32,348 मेगावाट से अधिक होकर नया कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है। बढ़ती मांग के कारण उपकेंद्रों एवं ट्रांसफार्मरों पर भार भी बढ़ा है, जिससे फॉल्ट की घटनाएं स्वाभाविक रूप से बढ़ रही हैं। लेकिन फॉल्टों को दूर करने वाले कर्मचारियों की संख्या लगातार कम किए जाने से उपभोक्ताओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा कई स्थानों पर आक्रोशित उपभोक्ताओं द्वारा उपकेंद्रों का घेराव भी किया जा रहा है।

संघर्ष समिति ने कहा कि यदि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन यह समझता है कि केवल उत्पीड़न के बल पर बिजली व्यवस्था संचालित की जा सकती है, तो उसके दुष्परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। संघर्ष समिति ने दोहराया कि हर घटना में अभियंताओं को निलंबित कर देने मात्र से बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं आ सकता।

संघर्ष समिति ने अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुई दुखद दुर्घटना के मामले में बिना किसी निष्पक्ष जांच के अधिशासी अभियंता को निलंबित किए जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। इसी प्रकार ट्रांसफार्मर खराब होने की घटनाओं पर बिना समुचित जांच के यह सामान्य आदेश जारी कर दिया गया है कि जूनियर इंजीनियर, सहायक अभियंताओं एवं अधिशाषी अभियंता के वेतन से धनराशि की वसूली की जाएगी। संघर्ष समिति ने कहा कि इस प्रकार के तानाशाहीपूर्ण एवं उत्पीड़नात्मक आदेश देश के किसी भी अन्य विद्युत उपक्रम में लागू नहीं हैं।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन अपनी हठधर्मिता त्यागकर कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में ले। मार्च 2023 से अब तक की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल समाप्त किया जाए तथा कर्मचारियों के सहयोग से प्रदेश में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्ययोजना बनाई जाए।

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