दुनियाभर के विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के बाद तुर्की को इजरायल अगला निशाना बन सकता है। पिछले हफ्ते तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने भी संभावना जताई कि ईरान के बाद इजरायल अगली सैन्य कार्रवाई सीरिया पर कर सकता है। हाल ही में तुर्की की एक अदालत में बेंजामिन नेतन्याहू समेत 35 इजरायली हस्तियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इसके बाद नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की आलोचना की। उन पर कुर्दों के नरसंहार का आरोप लगाया।
तुर्की की सरकार और कुर्दों के बीच बनती नहीं है। वह समय-समय पर अलग देश की मांग उठाते रहे हैं, जबकि तुर्की कुर्दों को अलगाववादी और आतंकी बताता है। सीरिया, इराक और तुर्की में रहने वाले कुर्दों का इजरायल ने हमेशा समर्थन किया है। दूसरी तरफ तुर्की की सेना ने सीरिया के अंदर घुसकर कुर्द बलों को निशाना बनाया। अब माना जा रहा है कि आने वाला संघर्ष सीरिया में होगा। इजरायल और तुर्की के बीच जंग का केंद्र कुर्द बनेंगे।
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सीरिया में होगी तुर्की की अग्निपरीक्षा
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा, ‘ईरान में जारी युद्ध के कारण वह (इजरायल) अभी कुछ नहीं कर रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कभी नहीं करेगा। इस समय सीरिया इजरायल की प्राथमिकता में नहीं है। बाद में जब समय आएगा तो इजरायल कार्रवाई कर सकता है। हमारे लिए सीरिया एक महत्वपूर्ण हित और सुरक्षा क्षेत्र है। हमें वहां हर संभावित स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।’
जो केंट के दावे से क्यों बढ़ी चिंता?
ईरान पर अमेरिका हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी केंद्र के निदेशक पद से इस्तीफा देने वाले जो केंट ने भी तुर्की पर हमले की संभावित योजना का खुलासा किया। यहां जो केंट का विश्लेषण इसलिए भी अहम है कि वह दो महीने पहले तक डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी थे। आज भले ही अपनी आलोचना की वजह से ट्रंप उन पर हमला करते हो। लेकिन केंट की बातों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। हो सकता है कि केंट के पास कुछ खुफिया जानकारी भी हो।
क्या है ट्रंप का नाटो प्लान?
कुछ समय से डोनाल्ड ट्रंप बार-बार नाटो से अमेरिका को अलग करने की बात कह चुके हैं। ईरान युद्ध के बीच भी उन्होंने यही कहा कि अगर नाटो अमेरिका का साथ नहीं देगा तो उसमें रहने का कोई औचित्य नहीं है। मगर अब जो कैंट ने खुलासा किया कि ट्रंप का नाटो से अमेरिका को हटाना विदेशी मामलों से बचने का तरीका नहीं है, बल्कि सीरिया में इजरायल और तुर्की के बीच होने वाले टकराव में तेल अवीव का साथ देना है।
ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका खुद ही नाटो को छोड़ दे, ताकि इजरायल तुर्की पर हमला कर सके, क्योंकि नाटो में अमेरिका के रहते ऐसा करना मुश्किल होगा। इसकी एक वजह नाटो का आर्टिकल 5 है। इसके मुताबिक एक देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। वहीं गठबंधन का सदस्य होने के नाते अमेरिका खुलकर इजरायल की मदद भी नहीं कर पाएगा। इन सभी असुविधाओं से बचने की खातिर ट्रंप पहले ही अमेरिका को नाटो से निकालना चाहते हैं, ताकि इजरायल की खुलकर सैन्य मदद की जा सके।
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इजरायल और तुर्की में कड़वाहट भी बढ़ रही
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की को गाजा पीस बोर्ड में शामिल किया है। इजरायल ने इसका खुलकर विरोध किया था। तब इजरायली सेना प्रमुख ने कहा था तुर्की के साथ तनाव संघर्ष की तरफ बढ़ रहा है। बाद में इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने 17 फरवरी को कहा कि तुर्का नया ईरान है। उनके बयान से साफ था कि इजरायल की निगाह अब तुर्की की तरफ घूमने लगी है। इस बीच जो केंट के विश्लेषण ने दुनियाभर की चिंता बढ़ा दी है।












