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अयोध्या से पैदल पवित्र जल लेकर घर पहुंचा बेटा:पिता का किया जलाभिषेक; बोले- माता-पिता का आशीर्वाद सबसे बड़ी पूंजी

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गौर ब्लॉक के सिटकोहर गांव निवासी राजेश कुमार ने पिता के प्रति समर्पण की अनूठी मिसाल पेश की। राजेश अयोध्या से पवित्र जल लेकर पैदल अपने गांव पहुंचे और घर पहुंचते ही सबसे पहले पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने श्रद्धा के साथ पिता का जलाभिषेक किया। बेटे के इस भावुक समर्पण को देखकर परिजन और ग्रामीण भी भावुक हो उठे। राजेश कुमार अयोध्या से पवित्र जल लेकर पैदल अपने गांव सिटकोहर के लिए रवाना हुए थे। लगातार पैदल यात्रा करने के बाद सोमवार 10 अगस्त की शाम करीब छह बजे वह गांव पहुंचे। घर पहुंचते ही उन्होंने किसी अन्य कार्य से पहले अपने पिता के चरण स्पर्श किए और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद राजेश ने अयोध्या से लाए पवित्र जल से अपने पिता का जलाभिषेक किया। उनका यह अनोखा भाव देखकर परिवार के लोगों के साथ आसपास के ग्रामीण भी मौके पर जुट गए। ग्रामीणों ने राजेश के इस कार्य को माता-पिता के प्रति सम्मान और सेवा की प्रेरणादायक मिसाल बताया। राजेश ने कहा कि माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा ही उनके लिए सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि जीवन में माता-पिता का आशीर्वाद सबसे बड़ी पूंजी है। उनके प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। पिता के चरण छूकर लिया आशीर्वाद गांव पहुंचने के बाद राजेश ने सबसे पहले पिता के चरण स्पर्श किए। इसके बाद अयोध्या से लाए पवित्र जल से उनका जलाभिषेक किया। इस दौरान परिवार में भावुक माहौल रहा। अयोध्या से पैदल लेकर आए पवित्र जल राजेश अयोध्या से पवित्र जल लेकर पैदल सिटकोहर के लिए रवाना हुए थे। लंबी यात्रा पूरी करने के बाद सोमवार शाम वह अपने घर पहुंचे और अपनी श्रद्धा पूरी की। बेटे का समर्पण देख भावुक हुए परिजन राजेश के इस कार्य को देखकर उनके परिजन भावुक हो गए। पिता के प्रति बेटे का प्रेम और सम्मान गांव में चर्चा का विषय बन गया। ग्रामीणों ने बताया प्रेरणादायक ग्रामीणों ने राजेश की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में जब माता-पिता की सेवा और सम्मान की बात बार-बार सामने आती है, ऐसे में उनका यह कदम समाज के लिए प्रेरणादायक है। माता-पिता का आशीर्वाद सबसे बड़ी पूंजी राजेश ने कहा कि माता-पिता की सेवा और सम्मान से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उनका आशीर्वाद जीवन में आगे बढ़ने की सबसे बड़ी ताकत है। गांव में हुई राजेश के समर्पण की चर्चा राजेश के इस भावपूर्ण कार्य की सिटकोहर गांव में खूब चर्चा रही। ग्रामीणों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण को नई पीढ़ी के लिए अनुकरणीय बताया।
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