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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने छात्रों और वकीलों पर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने छात्रों और अधिवक्ताओं पर हुए कथित लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून के शासन पर गंभीर आघात बताया है। 22 जुलाई 2026 को पारित एक प्रस्ताव में एसोसिएशन ने घटना की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
एसोसिएशन ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों, अधिवक्ताओं और अन्य नागरिकों के खिलाफ जिस प्रकार बल प्रयोग किया गया, वह अत्यधिक, असंगत और अस्वीकार्य है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग
SCBA ने अपने प्रस्ताव में कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। एसोसिएशन ने मांग की है कि पूरी घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए ताकि तथ्यों का पता चल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
घायलों के मुफ्त इलाज की भी मांग
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि लाठीचार्ज में घायल हुए सभी छात्रों और अधिवक्ताओं को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
संविधान और मानवाधिकारों के साथ खड़े होने का संकल्प
अपने प्रस्ताव में एसोसिएशन ने कहा कि वह घटना में घायल सभी लोगों के साथ एकजुटता से खड़ी है और संवैधानिक अधिकारों, मानव गरिमा तथा कानून के शासन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह प्रस्ताव SCBA की मानद सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा जारी किया गया।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब छात्रों के आंदोलन और उस पर पुलिस कार्रवाई को लेकर देशभर में बहस जारी है। देश की सबसे प्रतिष्ठित कानूनी संस्थाओं में से एक द्वारा जारी यह प्रस्ताव घटना की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग को और बल दे सकता है।

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