नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्र खारिज करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने कहा कि नामांकन पत्र खारिज करने को चुनौती देने वाली याचिका पर न तो उच्च न्यायालय सुनवाई कर सकता है और न ही उच्चतम न्यायालय। ऐसे में ये याचिका खारिज की जाती है।
सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उन्होंने एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई। सिंघवी ने कहा कि जिस आपराधिक मामले का जिक्र किया जा रहा है उसमें अभी संज्ञान भी नहीं लिया गया है। नटराजन के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के तहत संज्ञान लेने से पहले का समन जारी किया गया है।
जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 33ए के मुताबिक उन्हीं आपराधिक मामलों का खुलासा करना है जिनमें संज्ञान लिया जा चुका है।मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निर्वाची अधिकारी अरविन्द शर्मा ने ये कहते हुए खारिज कर दी थी कि उन्होंने अपने खिलाफ तेलंगाना में लंबित आपराधिक मामले का खुलासा नामांकन पत्र में नहीं किया। मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर 11 जून को निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी गयी। तीनों सीटें भाजपा के उम्मीदवारों ने जीती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की
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